ब्रिटेन ने ईरान के खिलाफ एक और बड़ा कदम उठाते हुए गुरुवार को **ईरानी तेल कारोबारी मोहम्मद हुसैन शमखानी और चार कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। आरोप है कि ये सभी तेहरान के उस नेटवर्क का हिस्सा हैं जो विदेशों में अस्थिरता फैलाने और क्षेत्रीय प्रॉक्सी संगठनों को सहयोग देने का काम करता है।
ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने कहा कि लगाए गए प्रतिबंधों में शमखानी और कंपनियों की **संपत्तियां फ्रीज** कर दी गई हैं। इसके अलावा शमखानी पर **यात्रा प्रतिबंध** भी लागू होगा। जिन कंपनियों पर कार्रवाई की गई है वे शिपिंग, पेट्रोकेमिकल और वित्तीय क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं।
ब्रिटेन के मध्य पूर्व मामलों के मंत्री हैमिश फाल्कनर ने कहा कि ईरान का यह व्यापारिक नेटवर्क और संबद्ध संगठन अस्थिर करने वाली गतिविधियों के लिए धन जुटाते हैं, जो ब्रिटेन समेत कई देशों की सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नेटवर्क क्षेत्रीय साझेदारों को मदद देने और ब्रिटेन में राज्य-प्रायोजित खतरों को अंजाम देने में शामिल है।
हालांकि, लंदन में ईरानी दूतावास ने इन प्रतिबंधों को “एकतरफा और अवैध” बताते हुए खारिज कर दिया। दूतावास ने कहा कि ये आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हैं।
गौरतलब है कि शमखानी ईरान के सर्वोच्च नेता **आयतुल्लाह अली खामेनेई के सलाहकार के बेटे** हैं। उन पर पहले भी अमेरिका और यूरोपीय संघ कार्रवाई कर चुके हैं। अमेरिका ने पिछले महीने उन पर प्रतिबंध लगाए थे, यह कहते हुए कि वे एक विशाल नेटवर्क के जरिए कंटेनर शिप और टैंकरों का संचालन करते हैं, जिनसे ईरानी और रूसी तेल समेत अन्य सामानों की वैश्विक बिक्री की जाती है। यूरोपीय संघ ने भी जुलाई में उन्हें ब्लैकलिस्ट किया था।
ब्रिटिश सांसदों ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि ईरान ब्रिटेन के लिए “बढ़ता हुआ और बहुआयामी खतरा” बन गया है। इसमें भौतिक हमले, असंतुष्टों और यहूदी समुदाय को निशाना बनाने की साजिशें, जासूसी, साइबर हमले और परमाणु हथियारों के विकास की कोशिशें शामिल हैं।
ईरान ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह सब राजनीतिक और शत्रुतापूर्ण कदम हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।