सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
गुवाहाटी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के तहत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने इस वर्ष जनवरी से जुलाई के दौरान देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जबर्दस्त अभियान चलाया। भागे हुए 738 बच्चों और तस्करी से 89 बच्चों एवं महिलाओं को बचाया तथा 9 मानव तस्करों को पकड़ा। रेस्क्यू किए गए बच्चों/महिलाओं को संबंधित चाइल्ड लाइन/एनजीओ, अभिभावकों और जीआरपी/पुलिस के हवाले कर दिया गया।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 16 से 19 अगस्त के बीच चलाए गए अलग-अलग अभियानों में, आरपीएफ कर्मियों ने इस जोन के क्षेत्राधिकार में विभिन्न ट्रेनों और स्टेशनों से भागे हुए 16 नाबालिगों को रेस्क्यू किया। बाद में उन सबको उचित माध्यमों से सुरक्षित अभिरक्षा में भेज दिया गया।
हाल ही में हुई एक घटना में, 16 अगस्त को, ट्रेन संख्या 12346 डाउन में एस्कॉर्ट ड्यूटी के दौरान, मालीगांव आरपीएफ कर्मियों ने भागे हुए दो नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया। बाद में, उनलोगों को क्रमशः चाइल्ड लाइन, बंगाईगांव और चिरांग को सौंप दिया गया। उसी दिन, डिब्रूगढ़ आरपीएफ पोस्ट ने एक नाबालिग लड़के को रेस्क्यू कर उसे चाइल्ड लाइन, डिब्रूगढ़ को सौंप दिया। 17 अगस्त को, डिमापुर आरपीएफ पोस्ट ने एक नाबालिग लड़के को रेस्क्यू कर चाइल्ड लाइन, डिमापुर के माध्यम से उसकी सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित की।
18 अगस्त को भागे हुए 5 नाबालिगों को कटिहार, पूर्णिया, कोकराझाड़ और अलीपुरदुआर में स्टेशनों एवं ट्रेनों से रेस्क्यू किया और उचित पहचान के बाद उन लोगों को संबंधित चाइल्ड लाइन या अभिभावकों को सौंप दिया गया। इसके अलावा, 19 अगस्त को आरपीएफ ने गुवाहाटी, कामाख्या, डिब्रूगढ़, जलालगढ़ और अलीपुरद्वार रेलवे स्टेशनों से 7 नाबालिगों को रेस्क्यू किया और उचित पहचान के बाद उनलोगों को संबंधित चाइल्ड लाइन या अभिभावक को सौंप दिया गया।
रेलवे अधिकारी ने दावा किया कि देखभाल और सहायता की आवश्यकता वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए एनएफआर का आरपीएफ प्रतिबद्ध है। यात्रियों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें और किसी भी लावारिस या संदिग्ध बच्चे की सूचना आरपीएफ हेल्पलाइन नंबर 139 पर दें।