देहरादून। संस्कार प्रणेता और प्रेरणाश्रोत आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज का चातुर्मास के अंतर्गत आज देहरादून में मंगल आगमन हुआ। आनंद चौक, तिलक रोड सहित विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भक्ति और उत्साह के साथ उनका भव्य स्वागत किया।
मंगलप्रभाति यात्रा सुबह 7:45 बजे श्री जैन भवन, गांधी रोड से प्रारंभ हुई। यह यात्रा जैन कॉलोनी, धामावाला, सराफा बाजार, कमल मार्केट, पीपल मंडी चौक, बैंड बाजार, अखाड़ा मोहल्ला और भंडारी चौक से होते हुए श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, झंडा बाजार पहुंची। यात्रा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा और भव्य स्वागत कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
प्रातः 8:30 से 9:30 बजे तक मंदिर परिसर में आचार्य श्री का **मंगल प्रवचन** आयोजित हुआ। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि रावण का पतन उसके “इगो” के कारण हुआ। “जब तक इगो रहता है, ईश्वर बाहर रहता है। ई मतलब ईश्वर और गो मतलब जाना।” आचार्य श्री ने समझाया कि जब भीतर और बाहर का आचरण अलग होता है तो मनुष्य विचलित रहता है। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति और धर्मनीति शर्तों पर आधारित हो गई हैं, जिससे षड्यंत्र पनपते हैं और समाज व परिवार का विघटन होता है। सही और गलत की पहचान केवल गुरुओं और संतों की संगति से संभव है, जो हमें विसंगतियों से दूर रखकर सही मार्ग दिखाते हैं।
प्रवचन के बाद आचार्य श्री का प्रवास **श्री मनोहर लाल जैन धर्मार्थ चिकित्सालय** और **श्री आयुष जैन (सीमेंट वालों)** के निवास स्थान, आनंद चौक पर रहा। दोपहर 3 बजे आयोजित **शंका समाधान सत्र** में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शाम के कार्यक्रम भी गुरु भक्ति के रंग में रंगे रहे।
मीडिया कोऑर्डिनेटर **मधु जैन** ने बताया कि कल दोपहर 3 बजे तुलसी प्रतिष्ठान, तिलक रोड पर आचार्य श्री द्वारा वर्षायोग के उपलक्ष्य में **ज्ञानवर्षा प्रवचन** दिया जाएगा, जिसमें जैन समाज ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के श्रद्धालु आमंत्रित हैं।