कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शनिवार को पंचायत चुनावों में गड़बड़ी और सभी संस्थाओं पर भाजपा के कथित कब्जे को लेकर भाजपा सरकार को जमकर घेरा। कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव में बाहुबल और धनबल का उपयोग कर जीत सुनिश्चित करने की कोशिश की।
हरीश रावत ने कहा कि पंचायत चुनाव में आरक्षण की खामियां सुनियोजित तरीके से देखी गईं और चार जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के आरक्षण में गड़बड़ी कर भाजपा ने लाभ उठाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई उम्मीदवारों के नाम मतदाता सूची में एक नहीं बल्कि तीन-तीन स्थानों पर दर्ज थे, बावजूद इसके उनका नामांकन सही माना गया। यह पूरी तरह से एक्ट के खिलाफ है और विधानमंडल की अवमानना है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बिहार और उत्तर प्रदेश में चुनाव के दौरान गोलियां चलती थीं, अब उत्तराखंड में भी इसी प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह बहुत ही चिंताजनक है। पहले मुख्यमंत्री के लिए दबाव होता था, अब राज्य की पुलिस भी सत्तारूढ़ दल के लिए वोट जुटाने में सक्रिय दिखाई देती है।
हरीश रावत ने कहा कि जनता का भाजपा से मोहभंग हो रहा है। कई मंत्री और विधायक के रिश्तेदार चुनाव में हार चुके हैं। नैनीताल की घटना ने राज्य की छवि को भी शर्मसार किया। नेता प्रतिपक्ष और उम्मीदवार के साथ धक्का-मुक्की की घटनाएं बहुत ही गंभीर हैं। उन्होंने आईपीएस एसोसिएशन से मांग की कि नैनीताल एसएसपी को इस प्रकार के कृत्यों के लिए सख्त संदेश देना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पंचायत चुनाव में हुई गड़बड़ियों और पंचायती राज व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले हर कदम का विरोध करेगी। हरीश रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सितंबर से राज्य भर में न्याय यात्रा निकालेंगे और इसे निजी एजेंडे का हिस्सा बनाएंगे। इस यात्रा का उद्देश्य राज्यवासियों को भाजपा की नीतियों और चुनावी धांधली के बारे में जागरूक करना है।
इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, गरीमा मेहरा दसौनी, प्रतीता सिंह सहित अन्य वरिष्ठ पार्टी सदस्य मौजूद रहे। हरीश रावत ने लोकसभा और राज्य विधानसभा स्तर पर भी पार्टी को सतर्क रहने और जनता के बीच जाकर कांग्रेस की विचारधारा को मजबूत करने का आह्वान किया।
हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार ने न केवल पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर किया, बल्कि चुनावी लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को भी चुनौती दी है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर हर स्तर पर विरोध करती रहेगी और जनता को सच्चाई से अवगत कराएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि गैरसैंण में स्थाई राजधानी के संबंध में उनका रुख स्पष्ट है और वह इस विषय पर अपने विचारों से पीछे नहीं हटेंगे।