क्या नेतन्याहू गाजा पर कब्जा करने वाले हैं या है कुछ और इरादा?

यरुशलम। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश गाज़ा पट्टी पर स्थायी कब्ज़ा करने का इरादा नहीं रखता, बल्कि मकसद है गाज़ा को हमास जैसे आतंकी संगठन से मुक्त कराना और वहां स्थिर, शांतिपूर्ण नागरिक प्रशासन स्थापित करना।

नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजराइली सुरक्षा कैबिनेट ने गाज़ा सिटी में सैन्य अभियान के बड़े विस्तार को मंज़ूरी दी है। इसके तहत हमास के ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है और इजराइली सेना तेजी से गाज़ा के कई हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित कर रही है।

शुक्रवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने कहा, “हमारा लक्ष्य गाज़ा पर स्थायी कब्ज़ा नहीं है। हम गाज़ा को निरस्त्र कर, वहां ऐसा प्रशासन स्थापित करना चाहते हैं जो न तो फिलीस्तीनी प्राधिकरण होगा, न ही हमास और न ही कोई अन्य आतंकी संगठन। यह कदम हमारे बंधकों को सुरक्षित वापस लाने और भविष्य में इजराइल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है।”

हालांकि इससे एक दिन पहले नेतन्याहू ने एक टीवी इंटरव्यू में गाज़ा पर पूर्ण नियंत्रण का संकेत दिया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पश्चिमी सहयोगी देशों में चिंता की लहर दौड़ गई थी। माना जा रहा है कि नेतन्याहू ने शुक्रवार को अपनी भाषा को थोड़ा नरम करके बयान दिया ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव को संतुलित किया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि नेतन्याहू द्वारा “कब्ज़ा” शब्द से बचना कानूनी कारणों से भी है। यदि इजराइल औपचारिक रूप से गाज़ा पर कब्ज़ा करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वहां के लोगों को बुनियादी सेवाएं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, जल और बिजली उपलब्ध करानी होगी, जिससे इजराइल की जिम्मेदारियां काफी बढ़ जाएंगी।

नेतन्याहू ने इस मुद्दे पर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से भी बात की और जर्मनी द्वारा इजराइल को हथियारों के निर्यात पर लगाई गई अस्थायी रोक पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इजराइल को हमास के खिलाफ लड़ाई में अपने सहयोगियों से समर्थन की अपेक्षा है, न कि दबाव की।

इधर गाज़ा में हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। सैन्य अभियानों के चलते आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हजारों लोग बेघर हो गए हैं और मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता बनी हुई है।

फिलहाल यह साफ है कि इजराइल हमास का पूरी तरह खात्मा चाहता है लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए वह गाज़ा को औपचारिक रूप से अधिग्रहित नहीं करना चाहता। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नेतन्याहू के नेतृत्व में इजराइल इस रणनीति को कैसे अंजाम देता है।

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