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झारखंड के दिशोम गुरु को अंतिम विदाई! कौन-कौन नेता पहुंचे श्रद्धांजलि देने?

Jharkhand: झारखंड की राजनीति के पुरोधा और झामुमो (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के संस्थापक, पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन को सोमवार को झारखंड विधानसभा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। ‘दिशोम गुरु’ के नाम से लोकप्रिय रहे शिबू सोरेन के निधन से राज्य ही नहीं, पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ और जुएल ओराम, बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी, राज्य सरकार के मंत्री इरफान अंसारी, दीपिका पांडे सिंह, योगेन्द्र प्रसाद, सुदिव्य सोनू और राधाकृष्ण किशोर समेत कई राजनीतिक दलों के नेता विधानसभा पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

विधानसभा परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान दो मिनट का मौन रखा गया। इस भावुक क्षण में राज्य के सभी विधायक और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह भी मोरहाबादी स्थित गुरुजी के आवास पर पहुंचे और उन्हें अंतिम प्रणाम किया।

शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा सोमवार सुबह मोरहाबादी स्थित उनके आवास से शुरू हुई। जैसे ही शव वाहन निकला, हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उमड़ पड़े। “वीर शिबू अमर रहें” के नारों से फिजां गूंज उठी। हर कोई गुरुजी की एक झलक पाने को बेताब नजर आया।

शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव **नेमरा (जिला रामगढ़)** में आज दोपहर किया जाएगा। अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस मौके पर देशभर से तमाम राजनीतिक हस्तियां वहां पहुंच रही हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी गुरुजी को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए रांची पहुंचेंगे। उनके कार्यक्रम के अनुसार, वे दोपहर 1:45 बजे रांची एयरपोर्ट पहुंचेंगे और फिर 3:30 बजे नेमरा के लिए रवाना होंगे। 4:00 बजे वे अंतिम संस्कार में भाग लेंगे और शाम 5:20 बजे वापसी के लिए रवाना होंगे। शाम 6:30 बजे वे दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी अंतिम संस्कार में भाग लेंगे। झारखंड की राजनीति के इस स्तंभ को विदाई देने के लिए कई अन्य राज्यों से भी नेता पहुंचने लगे हैं।

दिशोम गुरु के निधन से आदिवासी समाज ही नहीं, सामाजिक न्याय के समर्थक हर वर्ग में शोक है। उनके जीवन और संघर्ष ने झारखंड को एक अलग पहचान दिलाई। वह एक ऐसा चेहरा थे, जिन्होंने झारखंड को राज्य बनाने की लड़ाई में वर्षों संघर्ष किया।

राज्य सरकार द्वारा घोषित शोक के दौरान सरकारी कार्यालयों में झंडा झुका रहेगा। लोगों से अपील की गई है कि वे नेमरा में अंतिम संस्कार के दौरान श्रद्धांजलि देने शांतिपूर्ण ढंग से आएं और भीड़भाड़ से बचें।

गुरुजी का जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनका विचार, आदर्श और संघर्ष सदा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।

 

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