सावन मास के चौथे और अंतिम सोमवार को भी प्रयागराज में श्रद्धा और आस्था की अद्भुत मिसाल देखने को मिली। जहां एक ओर शहर के कई घाट और शिवालय बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर शिवभक्तों की आस्था की बाढ़ उमड़ पड़ी। हर ओर “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे।
सुबह भोर से ही श्रद्धालु शिव मंदिरों में जल चढ़ाने के लिए लाइन में लगने लगे। प्रयागराज के प्रमुख शिवालयों जैसे ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर (दशाश्वमेध घाट), नागवासुकी मंदिर, कोटेश्वर महादेव, ललितेश्वर महादेव, मनकामेश्वर महादेव, पांडेश्वर महादेव, फूटा हवन महादेव, नरकेश्वर महादेव, तक्षक मंदिर और बेणी माधव मंदिर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
सबसे खास बात यह रही कि यमुना और गंगा नदियों के उफान और बाढ़ के कारण कई मंदिरों की सीढ़ियां तक जलमग्न हो चुकी थीं, लेकिन भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आई। दशाश्वमेध घाट स्थित ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है, फिर भी श्रद्धालु पानी में उतरकर भगवान शंकर का जलाभिषेक कर रहे हैं।
इस मौके पर कांवड़ यात्रियों की भारी संख्या प्रयागराज में देखी गई। कांवड़िए दूर-दूर से गंगाजल लेकर भोलेनाथ को चढ़ाने पहुंचे। श्रद्धालु परिवार समेत मंदिरों में पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना की।
सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
भक्तों की भारी भीड़ और बाढ़ के कारण उत्पन्न संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन सतर्क रहा। कांवड़ यात्रियों और आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जगह-जगह पुलिस बल, जल पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं।
घाटों और प्रमुख मंदिरों के पास बैरिकेडिंग की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। साथ ही मंदिरों में स्वयंसेवक भी तैनात हैं जो श्रद्धालुओं को दिशा निर्देश दे रहे हैं।
श्रावण मास का अंतिम सोमवार शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।
श्रद्धा के आगे नतमस्तक प्रकृति भी
बारिश, बाढ़ और जलमग्न मंदिरों के बावजूद जो भक्तों का उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली, वह वाकई प्रेरणादायक है। हर उम्र के लोग, बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी जलाभिषेक के लिए जलकुंडों में उतरकर बाबा भोले के दरबार में हाजिरी लगाते दिखे।
श्रावण के इस पावन दिन पर प्रयागराज एक बार फिर आस्था की राजधानी बन गया। अब भक्त गण शिवरात्रि के इंतजार में हैं, जो आने वाले महीनों में विशेष धूमधाम से मनाई जाएगी।