थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दो प्राचीन शिव मन्दिरों को लेकर फिर संघर्ष, दोनों तरफ के कम से कम 42 मरे

सत्यनारायण मिश्रा । वरिष्ठ पत्रकार

थाईलैंड और कम्बोडिया के बीच हजार साल से अधिक प्राचीन हिंदू मंदिरों, विशेष रूप से प्रीह विहियर (Preah Vihear) और ता मुएन थॉम (Prasat Ta Muen Thom) को लेकर चल रहा सीमा विवाद 2025 में एक बार फिर हिंसक संघर्ष में बदल गया है। यह विवाद दशकों पुराना है और सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, और भौगोलिक दावों से जुड़ा हुआ है। नीचे इस संघर्ष के नवीनतम अपडेट और विस्तृत जानकारी दी गई है, जो विभिन्न स्रोतों से संकलित की गई है।

विवाद का केंद्र: प्रीह विहियर और ता मुएन थॉम मंदिर
1. **प्रीह विहियर मंदिर**:
– **स्थान**: यह 11वीं सदी का हिंदू मंदिर डांगरेक पहाड़ियों की 525 मीटर ऊंची चट्टान पर स्थित है, जो थाईलैंड के सीसाखेत और सुरीन प्रांतों और कंबोडिया के प्रीह विहियर प्रांत की सीमा पर है।
*ऐतिहासिक पृष्ठभूमि*: इस मंदिर का निर्माण खमेर साम्राज्य के राजा सूर्यवर्मन प्रथम और जयवर्मन सप्तम के शासनकाल में हुआ था। यह भगवान शिव को समर्पित है और इसमें शिवलिंग स्थापित है। यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
*विवाद का आधार* कंबोडिया का दावा है कि मंदिर उसकी सीमा के भीतर है, जबकि थाईलैंड का कहना है कि मंदिर का कुछ हिस्सा उसके सुरीन प्रांत में आता है। 1962 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा घोषित किया, लेकिन आसपास की 4.6 वर्ग किलोमीटर भूमि पर दोनों देशों के दावे बरकरार हैं। 2013 में ICJ ने इस भूमि को भी कंबोडिया को सौंपने का फैसला किया, जिसे थाईलैंड ने पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।

2. *ता मुएन थॉम मंदिर*
*स्थान*: यह मंदिर प्रीह विहियर से लगभग 95 किलोमीटर पश्चिम में, थाईलैंड के सुरीन प्रांत और कंबोडिया के ओड्डर मीनचे प्रांत की सीमा पर स्थित है।
*ऐतिहासिक पृष्ठभूमि*: 12वीं सदी का यह मंदिर भी खमेर साम्राज्य द्वारा बनाया गया और शिव को समर्पित है। इसमें एक प्राकृतिक शिवलिंग है, जो इसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
विवाद का आधार इस मंदिर के आसपास का क्षेत्र भी दोनों देशों के बीच विवादित है। थाईलैंड और कंबोडिया दोनों इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानते हैं, और हाल के हमलों ने इस मंदिर को भी संघर्ष का केंद्र बना दिया है।
हाल के हिंसक संघर्ष
1. संघर्ष की शुरुआत
24 जुलाई 2025 को सुबह ता मुएन थॉम मंदिर के पास थाईलैंड के सुरीन प्रांत में कंबोडियाई ड्रोन की मौजूदगी और छह सशस्त्र कंबोडियाई सैनिकों की गतिविधियों ने तनाव बढ़ाया। थाईलैंड ने इसे उकसावे की कार्रवाई माना और जवाबी कार्रवाई शुरू की।
– दोनों देशों ने एक-दूसरे पर पहले गोलीबारी शुरू करने का आरोप लगाया। कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता माली सोचेटा ने दावा किया कि थाई सैनिकों ने उनकी सीमा में घुसपैठ की, जिसके जवाब में कंबोडिया ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की।

2. हिंसा का विस्तार
– संघर्ष ता मुएन थॉम मंदिर से शुरू होकर प्रीह विहियर और अन्य छह सीमावर्ती क्षेत्रों तक फैल गया। थाईलैंड ने F-16 लड़ाकू विमानों से कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसमें एक सैन्य ठिकाना नष्ट हो गया।
– कंबोडिया ने बीएम-21 रॉकेट लॉन्चर और तोपखाने का उपयोग किया, जिससे थाईलैंड में एक अस्पताल और पेट्रोल पंप प्रभावित हुए।
– 24 जुलाई को थाई वायुसेना ने कंबोडिया के सिएम रीप प्रांत में प्रसात ता मोआन सेन्चे पैगोडा पर तीन बम गिराए, जिससे यह बौद्ध स्थल पूरी तरह नष्ट हो गया। इसके बाद बौद्ध भिक्षुओं को वहां से भागना पड़ा।

3. हानि और प्रभाव
– अब तक इस संघर्ष में कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 11 थाई नागरिक, एक कंबोडियाई सैनिक, और अन्य शामिल हैं। थाईलैंड में 40,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, और सवा लाख लोग प्रभावित क्षेत्रों से पलायन कर चुके हैं।
– यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रीह विहियर मंदिर और ता मुएन थॉम मंदिर को भारी क्षति पहुंची है, जिससे सांस्कृतिक धरोहरों के नुकसान की चिंता बढ़ गई है।
– थाईलैंड ने अपनी सीमा बंद कर दी और कंबोडिया के राजदूत को निष्कासित कर दिया। कंबोडिया ने भी जवाबी कार्रवाई में अपने राजदूतों को वापस बुलाया और थाई राजनयिकों को निष्कासित करने की घोषणा की।

4. *राजनीतिक प्रभाव*:
– थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैटोंगटर्न शिनावात्रा को इस विवाद के कारण नैतिक लापरवाही के आरोपों में 2 जुलाई 2025 को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया। उनकी कंबोडिया के पूर्व नेता हुन सेन के साथ फोन कॉल लीक होने के बाद थाईलैंड में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
– कंबोडिया के पूर्व नेता हुन सेन ने इस संघर्ष को राष्ट्रवादी एजेंडे के रूप में भुनाने की कोशिश की, जिससे तनाव और बढ़ा।

विवाद की ऐतिहासिक जड़ें
1. *औपनिवेशिक काल और सीमा निर्धारण*:
– 1904-1907 में फ्रांस (जिसका तब कंबोडिया पर औपनिवेशिक शासन था) और सियाम (आधुनिक थाईलैंड) के बीच सीमा निर्धारण हुआ। फ्रांसीसी सर्वेक्षण ने प्रीह विहियर मंदिर को कंबोडिया की सीमा में दिखाया, जिसे थाईलैंड ने बाद में पक्षपातपूर्ण बताया।
– 1794 तक खमेर साम्राज्य कमजोर पड़ने के कारण सियाम ने कंबोडिया के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों, जिसमें प्रीह विहियर शामिल था, पर नियंत्रण हासिल कर लिया।

2. पिछले संघर्ष
– 2008 में जब कंबोडिया ने प्रीह विहियर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल करवाया तो थाईलैंड में इसका विरोध हुआ और हिंसक झड़पें शुरू हो गईं। 2011 में एक सप्ताह तक चली लड़ाई में 18 लोग मारे गए और हजारों विस्थापित हुए।
– मई 2025 में ता मुएन थॉम मंदिर के पास कंबोडियाई सैनिकों द्वारा राष्ट्रगान गाने और थाई सैनिकों को चुनौती देने की घटना ने तनाव को फिर से बढ़ाया।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत की स्थिति
1. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय
– कंबोडिया ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से इस मुद्दे पर आपात बैठक बुलाने की मांग की है।
– विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो चीन इसका लाभ उठा सकता है, जैसा कि उसने म्यांमार और अन्य क्षेत्रों में किया है। थाईलैंड, जो परंपरागत रूप से अमेरिका का सहयोगी रहा है, हाल के वर्षों में चीन के साथ अपने सैन्य और आर्थिक संबंधों को गहरा रहा है।

2. भारत की स्थिति
– भारत ने इस मामले में तटस्थ रुख अपनाया है। भारत के थाईलैंड और कंबोडिया दोनों के साथ अच्छे सांस्कृतिक, व्यापारिक, और सैन्य संबंध हैं। भारत कंबोडिया को आईटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, और सैन्य प्रशिक्षण में सहायता प्रदान करता रहा है, साथ ही कई मंदिरों के जीर्णोद्धार में भी मदद की है।
– भारत ने दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं
वर्तमान स्थिति: 25 जुलाई 2025 तक दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद ठप है। थाईलैंड ने सीमा पार करने और कंबोडिया से व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया है। कंबोडिया ने भी जवाबी कार्रवाई की है।
संभावित परिणाम
– यदि यह संघर्ष नहीं रुका, तो यह दक्षिण-पूर्व एशिया में एक बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है, जिसका असर क्षेत्रीय स्थिरता और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
– यूनेस्को और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने मंदिरों को होने वाले नुकसान पर चिंता जताई है और दोनों देशों से सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है।
– मई 2025 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते, जिसमें मंदिर क्षेत्र में केवल पांच-पांच सैनिक तैनात करने की सहमति बनी थी, का उल्लंघन हुआ है, जिससे विश्वास की कमी और बढ़ गई है।
निष्कर्ष
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच प्रीह विहियर और ता मुएन थॉम मंदिरों को लेकर चल रहा विवाद ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, और राजनीतिक कारणों से जटिल है। हाल के हिंसक संघर्ष ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जिससे सांस्कृतिक धरोहरों को नुकसान और जनहानि हुई है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और भारत इस मामले में शांति और कूटनीतिक समाधान की वकालत कर रहे हैं। इस स्थिति पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

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