ईरान ने अमेरिका के परमाणु ठिकानों पर हमले को बताया कूटनीति का अंत, सेना तय करेगी जवाबी कार्रवाई का तरीका
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान ने जताई गहरी नाराजगी, 950 लोगों की मौत की पुष्टि
संयुक्त राष्ट्र।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि आमिर सईद इरावनी ने अमेरिका और इजराइल के ताजा सैन्य हमलों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करके “कूटनीति के रास्ते बंद करने का निर्णय ले लिया है”, और अब देश की सेना यह तय करेगी कि जवाबी कार्रवाई “कब, कैसे और किस पैमाने पर” की जाएगी।
इरावनी ने चेताया कि ईरान अब हरसंभव कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका को चेताया गया था कि वह “इस युद्धोन्माद के दलदल में न फंसे”, लेकिन वॉशिंगटन ने इस चेतावनी की अनदेखी की।
ईरानी राजदूत ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को “पश्चिम के घृणित कृत्य” कराने के लिए उकसाया और अमेरिका की विदेश नीति को “हाईजैक” कर लिया है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका एक और “निराधार युद्ध” में उलझ गया है।
ईरान के विदेश मंत्री द्वारा यूरोपीय देशों के समकक्षों से वार्ता किए जाने का हवाला देते हुए इरावनी ने सवाल उठाया कि जब अमेरिका खुद कूटनीति के मार्ग बंद कर रहा है तो ईरान को “बातचीत की मेज” पर लौटने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? उन्होंने जोर देकर कहा कि “ईरान ने कभी कूटनीति छोड़ी ही नहीं थी।”
950 की मौत, 3,450 घायल – मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट
दुबई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान में अब तक 950 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 3,450 लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी अमेरिकी मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ने दी है, जो ईरान में संघर्ष संबंधी आंकड़ों पर काम करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मारे गए लोगों में 380 नागरिक और 253 सुरक्षा बल के जवान शामिल हैं। शेष मृतकों की जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। संगठन का कहना है कि यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि ईरान सरकार हताहतों की वास्तविक संख्या छिपा रही है।
गौरतलब है कि ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में एक बयान में केवल 400 नागरिकों की मौत और 3,056 घायलों की पुष्टि की थी, जो मानवाधिकार संगठन द्वारा दी गई संख्या से काफी कम है।
यह हालिया घटनाक्रम क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है, जहां पहले से ही अमेरिका-ईरान और इजराइल के बीच संबंध चरम तनाव की स्थिति में हैं। आने वाले समय में ईरान की सेना द्वारा लिए गए फैसले और उनके कार्यान्वयन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।