एक अनाेखा सदियों पुराना नाग मंदिर जहां हाेती है खंडित मूर्तियों की पूजा

औरैया। नागपंचमी का पर्व शुक्रवार को बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन श्रद्धालु नाग देवता का पूजन अर्चन करते हैं। नाग पंचमी के अवसर पर हिन्दुस्थान समाचार आज एक ऐसे अनाेखे नाग मन्दिर के बारे में जानकारी दे रहा, जिसके बारे जानकर आप दंग रह जाएंगे। यह ऐतिहासिक मंदिर औरैया जनपद के सेहुद ग्राम में स्थिति है। इस मंदिर को धौरा नाग मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर नाग-नागिन का जोड़ा भी रहता है। जाे यदा-कदा लोगों को दर्शन भी होता रहते हैं। इस अनोखे नाग मंदिर में छत ना होना जितनी हैरान करने वाली बात है, उसके पीछे की सच्चाई भी उतनी ही भयानक है।

ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर में सदियों पुरानी मूर्तियां विराजमान हैं जो लगभग 11वीं सदी में मोहम्मद गजनवी के आक्रमण के समय मंदिरों में मूर्तियों की तोड़फोड़ की हकीकत को बयां करती हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह मंदिर कितना पुराना है। धौरा नाग मंदिर की सिर्फ यही खूबी इसे अन्य मंदिरों से अलग करती है। यहां नाग पंचमी के दिन आस-पास के जनपदों से भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु पूजन करने के लिए आते हैं।

औद्योगिक नगरी दिबियापुर से लगभग पांच किलोमीटर दूर सेहुद स्थिति धौरा नाग मंदिर में आज तक छत नहीं डाली जा सकी है। कहा जाता है कि हिंदू धर्म में खंडित मूर्तियों की पूजा नहीं की जाती है। जबकि इस मंदिर में मौजूद देवी देवताओं की खंडित मूर्तियों की ही पूजा की जाती है। लोगों की मान्यता है कि साक्षात नाग देवता मंदिर परिसर में वास करते हैं। मंदिर में जिसने भी छत डलवाने की कोशिश वो इसमें असफल रहे। छत डलवाने वाले की या तो मौत हो जाती है या फिर उसका बहुत बड़ा नुकसान हो जाता है। लोगों का कहना है कि गांव के ही एक इंजीनियर ने नाग मंदिर में छत डलवाने की कोशिश की थी। जिसके बाद उनके घर में दो लोगों की आकस्मिक मौत हो गई। छत तो दूर इस मंदिर से कोई छोटा पत्थर का टुकड़ा भी उठा कर नहीं ले जा सकता है।

नाग पंचमी पर इस मन्दिर में श्रद्धालु विशेष पूजा अर्चना करते हैं। यहां मौजूद कुंड में दूध चढ़ाने आते हैं जिसको नाग देवता पीते हैं। इसके साथ ही यहां पर दो दिन तक लगातार मेला चलता है। मेले में दंगल का भी आयोजन होता है।

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