अधीनस्थ चयन आयोग की सभी भर्तियों की हो सीबीआई जांच : कांग्रेस
सहकारिता विभाग की भर्ती के लिए मंत्री को हटाने की मांग की
देहरादून। कांग्रेस ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की अभी तक की गयी सभी भर्तियों की सीबीआई से जांच कराये जाने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष संगठन मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि विगत दिनों उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से वीपीडीओ पदों के लिए हुई भर्ती परीक्षा में 15-15 लाख रुपये लेकर पेपर लीक कर नौकरियां बेचने का मामला सामने आया है। इसके साथ ही बहुत सारे खुलाशे हो रहे हैं।
जोशी ने परन्तु राज्य सरकार की ओर से इस मामले में मात्र कुछ गिरफ्तारियां कर अपनी जिम्मेदारियों की इतिश्री कर दी गई है। उन्होंने कहा है कि अधीनस्थ चयन आयोग में अब तक परीक्षा में हुए घोटाले के खुलासे से स्पष्ट हो गया है कि फारेस्ट गार्ड भर्ती, ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम विकास अधिकारी, एलटी भर्ती सहित कई विभागों की लिपिकीय व चालकों की भर्ती में भी भारी घोटाला हुआ है तथा ये सभी भर्तियां संदेह के घेरे में हैं।
घोटाले में अब तक जितने भी घोटालेबाज पुलिस की गिरफ्त में आए हैं वे सिर्फ मोहरे मात्र हैं तथा असली घोटालेबाजों तक सरकारी तंत्र नहीं पहुंचाना चाहता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पहले से ही मांग करती आ रही है कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में हुए भर्ती घोटाले की उच्चस्तरीय जांच करायी जाती है तो इसमें सत्ता प्रतिष्ठान, अधीनस्थ चयन आयोग, सचिवालय, विधानसभा के बैठे कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अब तक परीक्षा में हुए घोटाले के खुलासे के बाद सबसे पहले जिस व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई है वो उसी कंपनी से जुड़ा है। जिसने इसी साल विधानसभा चुनावों से पहले विधानसभा सचिवालय के लिए सीधी भर्ती की परीक्षा आयोजित की थी। मामले की जांच तो दूर विधानसभा सचिवालय ने आज तक उस कंपनी का नाम तक सार्वजनिक नहीं किया है।
वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सीधी भर्ती के परीक्षा परिणाम पर रोक लगाना भर्ती घोटाले की ओर स्पष्ट इशारा करता है। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में ये भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई। कांग्रेस नेता जोशी ने कहा कि पिछली त्रिवेन्द्र सरकार में भाजपा के ही दो विधायकों यतीश्वरानंद एवं सुरेश राठौर ने भी सहकारिता विभाग में हो रहे भर्ती घोटाले के खिलाफ आवाज उठाई थी तथा कांग्रेस पार्टी लगातार सहकारिता विभाग की भर्तियों में हो रहे घोटाले की जांच की मांग कर रही है।
उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों में 6१ पदों पर हुई भर्तियों में बैंक अध्यक्ष, सचिव तथा अधिकारियों पर मिलीभगत कर अपने रिश्तेदारों, चहेतों को रेवड़ी बांटने के आरोपों का विभागीय मंत्री के पास कोई जवाब नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि सहकारिता विभाग में हुए भर्ती घोटाले की जांच से पहले विभागीय मंत्री को पद से हटाया जाना चाहिए तभी मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद की जा सकती है।