रास के लिए दक्षिण भारत के चार दिग्गज मनोनीत

हैदराबाद। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आंध्र प्रदेश के प्रमुख तेलुगू पटकथा लेखक कोडुरी विश्व विजयेंद्र प्रसाद, केरल की महान एथलीट पी.टी. उषा, तमिलनाडु के फिल्म संगीतकार इलैयाराजा और कर्नाटक के परोपकारी वीरेंद्र हेगड़े को राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किया है।

प्रमुख तेलुगू पटकथा लेखक कोडुरी विश्व विजयेंद्र प्रसाद को राष्ट्रपति कोटे के तहत राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि वी. विजयेंद्र प्रसाद गारू दशकों से रचनात्मक दुनिया से जुड़े हुए हैं।

उनकी रचनाएँ भारत की गौरवशाली संस्कृति को प्रदर्शित करती हैं और विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘राज्यसभा के लिए मनोनीत होने पर उन्हें बधाई। अस्सी वर्षीय विजयेंद्र दक्षिण भारतीय राज्यों से राज्यसभा के लिए चुने गए चार उम्मीदवारों में शामिल हैं।

अन्य में केरल की महान एथलीट पीटी उषा, तमिलनाडु के फिल्म संगीतकार इलैयाराजा और कर्नाटक के परोपकारी वीरेंद्र हेगड़े शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के कोव्वूर में जन्मे, भारतीय पटकथा लेखक और फिल्म निर्देशक विजयेंद्र तमिल और हिंदी सिनेमा के अलावा, मुख्य रूप से तेलुगु सिनेमा में अपने कामों के लिए जाने जाते हैं।  विजयेंद्र के दो बच्चे हैं, जिनमें से एक पुत्री और एक पुत्र है।

उनके पुत्र एस. एस. राजामौली फिल्म निर्माता हैं। उनकी फिल्मोग्राफी में पटकथा लेखक के रूप में पच्चीस से अधिक फिल्में शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश व्यावसायिक रूप से सफल रहीं। श्री विजयेंद्र ने अपने पुत्र राजामोली द्वारा निर्देशित बाहुबली सहित कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए कहानियां लिखी हैं।

पटकथा लेखक के रूप में उनका उल्लेखनीय काम आरआरआर, बजरंगी भाईजान, मणिकर्णिका: द क्वीन आफ झांसी, मगधीरा और मर्सल के लिए भी है। तीन फिल्में- बाहुबली: द बिगिनिंग (2015), बाहुबली 2: द कन्क्लूजन (2017)और आरआरआर (2022) भारत में अब तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली पांच फिल्मों में शुमार हैं, जिनका निर्देशन उनके पुत्र राजामौली ने किया है।

वर्ष 2011 में, विजयेंद्र ने तेलुगु फिल्म राजन्ना का निर्देशन किया, जिसने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नंदी पुरस्कार जीता और उन्होंने फिल्म बजरंगी भाईजान के लिए 2016 में सर्वश्रेष्ठ कहानी का फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता। श्री विजयेंद्र ने पटकथा लेखन जोड़ी सलीम-जावेद (सलीम खान और जावेद अख्तर) को उनके काम के लिए एक प्रमुख प्रेरणा के रूप में उद्धृत किया, विशेष रूप से शोले (1975) के लिए उनकी पटकथा को।

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