टिकट न मिलने से भाजपा में बगावत, पति-पत्नी मैदान में डटे

अल्मोड़ा। जिले की सोमेश्वर सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बलवंत आर्य ने बताया कि वह 25 साल से भाजपा में सक्रिय थे लेकिन, पार्टी ने उनकी घोर उपेक्षा की है।

इसलिए वह भाजपा छोड़ समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। वह पिछले पांच वर्षों से चुनाव की तैयारी कर रहे थे।

इधर उनकी पत्नी मधुबाला आर्य ने कहा कि उन्होंने इस बार भाजपा से दावेदारी की थी। उन्होंने भाजपा मंडल अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष तथा प्रदेश अध्यक्ष को अपनी दावेदारी का आवेदन भेजा था, लेकिन उनके आवेदन पर कोई विचार नहीं किया गया तथा भाजपा संगठन ने सोमेश्वर विस क्षेत्र से कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य को एकमात्र दावेदार घोषित कर दिया।

उनके आवेदन को दरकिनार कर पैनल में उनका नाम तक नहीं भेजकर उनकी घोर उपेक्षा की है। भाजपा ने उनको टिकट नहीं दिया इसलिए वह भी निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। यह उनका निजी फैसला है। वह भाजपा प्रत्याशी को चुनाव में मात देने के उद्देश्य से ही मैदान में उतरी हैं।

दोनों पति-पत्नी चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए अपनी अलग से रणनीति बना रहे हैं। प्रचार में भी अलग-अलग क्षेत्रों में जा रहे हैं। शाम को घर में एक साथ रहकर भोजन करते हैं। बलवंत आर्य ने हाईस्कूल तक पढ़ाई की है। जबकि मधुबाला स्नातक है।

मधुबाला वर्तमान में ताकुला ब्लाक से जिला सहकारी बैंक की निदेशक भी हैं। वह कई वर्षों से भारतीय जनता पार्टी और महिला मोर्चा की सक्रिय सदस्य रही हैं।

घर में हैं चार बच्चे, जिनमें दो मतदाता हैं

सपा प्रत्याशी बने बलवंत आर्य और निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरी मधुबाला आर्य के घर में उनके बच्चों का समर्थन भी बड़ा दिलचस्प दिखाई दे रहा है। बलवंत आर्य ने कहा कि उनके चार बच्चे हैं। जिनमें दो बेटे और दो बेटियां हैं। लेकिन अभी केवल दो बेटियां ही वोटर बनी हैं।

बेटियों ने भी घर में न्याय की बात करते हुए कहा है कि एक वोट पापा को तो एक वोट मम्मी को मिलेगा। लेकिन दोनों बेटियां यह बताने को तैयार नहीं है कि कौन मम्मी को वोट देगी और कौन पापा को।

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