कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रकार की हस्तनिर्मित वस्तुएं तैयार कीं। समापन अवसर पर इन उत्पादों को प्रदर्शनी में रखा गया। खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने केवल अपनी कला का प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि बिक्री के उद्देश्य से अलग-अलग स्टॉल भी लगाए। इन स्टॉलों के माध्यम से छात्रों को अपने उत्पादों की कीमत तय करने, उनकी उपयोगिता बताने और ग्राहकों से संवाद करने का व्यावहारिक अनुभव मिला।
विश्वविद्यालय की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता के साथ उद्यमशीलता की भावना विकसित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना था। साथ ही भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की सराहना की और स्वयं खरीदारी कर उनका उत्साह बढ़ाया। अतिथियों ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन के अनुभव प्रदान करती हैं। इससे उनमें उत्पाद निर्माण, विपणन, वित्तीय प्रबंधन और व्यवसाय संचालन की समझ विकसित होती है।
प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। तीन दिवसीय कार्यशाला ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही स्वरोजगार और उद्यमिता की संभावनाओं को समझने का अवसर प्रदान किया।

