महाराज ने कहा कि देश के जवान सीमाओं की रक्षा के लिए दिन-रात तत्पर रहते हैं। उनका साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व सैनिक अपने अनुभव और अनुशासन से समाज तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं। वहीं, वीर नारियां और सैनिक परिवार भी त्याग के माध्यम से राष्ट्रसेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि नौगांवखाल में सीएसडी कैंटीन शुरू होने से पात्र सैनिकों, पूर्व सैनिकों और अन्य अधिकृत लाभार्थियों को निर्धारित नियमों के तहत दैनिक जरूरत की वस्तुएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने कैंटीन के संचालन को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखने की अपेक्षा जताई।
शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में हुए कार्य
सतपाल महाराज ने बताया कि क्षेत्र में स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के सम्मान में कई कार्य कराए गए हैं। ग्राम सिंवाल में 12 स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर शहीद द्वार, पिनानी में आनंद सिंह स्मृति द्वार, बघेली में बाबा माहेन सिंह उत्तराखण्डी स्मृति द्वार और सीला में स्वतंत्रता सेनानी बलवंत मियां की मूर्ति स्थापित कराई गई है। सकनोली के शहीद मंदीप सिंह के नाम पर मोटर मार्ग का नामकरण किया गया है। वहीं, गिंवाली में शहीद सतवीर सिंह के स्मारक की मरम्मत के लिए विधायक निधि से 1.50 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सैनिक परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं
महाराज ने बताया कि राज्य सरकार शहीद सैनिकों के आश्रितों को 50 लाख रुपये और घर की मरम्मत के लिए दो लाख रुपये की सहायता दे रही है। पूर्व सैनिकों की विधवाओं को पुत्री के विवाह के लिए एक लाख रुपये तथा द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोटद्वार में शहीद स्थल के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरित हो चुकी है और जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पूर्व सैनिक संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। मंच संचालन राजेंद्र सिंह रावत ने किया।
