नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आंदोलनों का उद्देश्य समाज की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ उठाना या किसी व्यक्ति और समूह के प्रति नफरत फैलाना। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आंदोलन राजनीति का हथियार बनते हैं, तो इससे समाज में कटुता और विभाजन बढ़ सकता है।
संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी एवं शस्त्रपूजन समारोह को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि आंदोलनों के दौरान भी संविधान, कानून और संवाद की मर्यादा का पालन जरूरी है। राजनीतिक लाभ और सस्ती लोकप्रियता के लिए विवेक तथा सद्भावना से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों, शासन-प्रशासन और राजनीतिक नेताओं से समाज में वैमनस्य फैलाने से बचने की अपील की।
संवाद से निकलेगा समस्याओं का समाधान
डॉ. भागवत ने कहा कि सामाजिक समस्याओं का समाधान केवल सरकार या आंदोलनों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी और आपसी संवाद जरूरी है। छोटी-छोटी घटनाओं के आधार पर लोगों को भड़काने और अविश्वास बढ़ाने वाली प्रवृत्तियों से बचना होगा।
नशे की लत पर जताई चिंता
युवाओं में बढ़ती नशे की लत को गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे निपटने के लिए शासन, प्रशासन और समाज को मिलकर काम करना होगा। नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों और सद्विवेक को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि नशे के खिलाफ जनजागरण और रोकथाम के प्रयासों में संघ के स्वयंसेवक भी योगदान देंगे।
पंच परिवर्तन को जीवन में उतारने का आह्वान
संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यों का उल्लेख करते हुए भागवत ने सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध एवं स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यपालन को पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख सूत्र बताया। उन्होंने इन्हें दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास के साथ नैतिक अनुशासन भी जरूरी है। तकनीक का इस्तेमाल असत्य फैलाने और लोगों को गुमराह करने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने संत रविदास के सामाजिक समरसता और भक्ति संबंधी योगदान को भी याद किया।
समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और अन्य प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। वरिष्ठ संपादक संजय गुप्ता समारोह के मुख्य अतिथि थे।
