देहरादून। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने कहा कि देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए केवल दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समय पर जांच, सही उपचार, बेहतर पोषण, जनजागरूकता और समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ प्रत्येक मरीज तक पहुंचाना होगा, ताकि बीमारी की पहचान और उपचार में देरी न हो।
राज्यपाल ने शुक्रवार को एम्स ऋषिकेश में आयोजित टीबी पर राष्ट्रीय सम्मेलन एवं नीति संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि टीबी केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। बीमारी का असर मरीज के परिवार, आजीविका और सामाजिक जीवन पर पड़ता है। इसलिए टीबी से पीड़ित लोगों के साथ संवेदनशीलता बरतने और उन्हें भेदभाव से बचाने की जरूरत है।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान, निक्षय पोषण योजना, निक्षय मित्र पहल और टीबी मुक्त पंचायत जैसे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए सरकारी प्रयासों के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है। आशा कार्यकर्ताओं, अन्य स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस की भूमिका इस अभियान में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक और भ्रांतियों को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि मरीजों को दूरी और भेदभाव नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और सहयोग मिलना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, लंबी दूरियों और मौसम की चुनौतियों के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना कठिन होता है। ऐसे में आधुनिक तकनीक प्रभावी समाधान बन सकती है। उन्होंने एम्स ऋषिकेश की ओर से दूरस्थ क्षेत्रों तक टीबी की दवाएं पहुंचाने के लिए ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को सराहनीय पहल बताया।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता केवल जांचों की संख्या या मशीनों की उपलब्धता से नहीं, बल्कि मरीज की समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से तय होनी चाहिए।
राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में होने वाला विचार-विमर्श ठोस कार्ययोजना और प्रभावी नीतियों में बदलेगा। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश में विकसित स्वास्थ्य मॉडल देश के अन्य पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह, नंदीश आर. पैठानी, डॉ. प्रतिमा गुप्ता और डॉ. गिरीश सिंधवानी सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।
