देहरादून, 8 अक्टूबर। उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्की छत का सहारा बन रही है। वर्ष 2022 से अब तक राज्य में योजना के तहत 39,815 परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए जा चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ऊधमसिंह नगर इस मामले में सबसे आगे है, जहां 4,882 परिवारों को आवास का लाभ मिला है।
इसके बाद हरिद्वार में 4,493, रुद्रप्रयाग में 4,032, चमोली में 3,900, पिथौरागढ़ में 3,386 और पौड़ी में 3,195 आवास बनाए गए हैं। वहीं उत्तरकाशी में 3,057, देहरादून में 2,839, चंपावत में 2,789, बागेश्वर में 2,279, टिहरी में 2,134, नैनीताल में 1,480 और अल्मोड़ा में 1,349 परिवारों को योजना का लाभ मिला है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। इसका उद्देश्य बेघर तथा कच्चे या जर्जर मकानों में रहने वाले पात्र परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का आवास उपलब्ध कराना है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र लाभार्थी को 1.30 लाख रुपये की सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से दी जाती है।
आवास के साथ लाभार्थियों को अन्य सुविधाओं से भी जोड़ा जा रहा है। शौचालय निर्माण के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। इसके अलावा आवास निर्माण के लिए 95 दिन की मजदूरी का प्रावधान है। पात्र परिवारों को पेयजल, उज्ज्वला गैस और बिजली कनेक्शन जैसी सुविधाओं का लाभ भी दिया जाता है।
राज्य सरकार के अनुसार वर्ष 2022-23 से रसोई सामग्री और बर्तन खरीदने के लिए दी जाने वाली अतिरिक्त सहायता को पांच हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य योजना का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और अधिक से अधिक आवासों की स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के समक्ष भी विषय रखा गया है।
