बारिश में 58% कमी से बेहाल कर्नाटक, फसलें तबाह और जलाशय सूखे

नई दिल्ली। कर्नाटक में सूखे की गंभीर स्थिति को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र से तत्काल वित्तीय सहायता जारी करने की मांग की है। खरगे ने राज्य सरकार की ओर से राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) के तहत मांगी गई 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता राशि बिना कटौती जारी करने का अनुरोध किया है।

खरगे के मुताबिक, कर्नाटक में सितंबर तक मानसून में 58 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इससे राज्य के सभी 31 जिले प्रभावित हुए हैं। 1 जून से 31 अगस्त के बीच सामान्य 691 मिमी के मुकाबले केवल 477 मिमी बारिश हुई, जो पिछले 50 वर्षों में दूसरी सबसे कम वर्षा बताई गई है।

राज्य के 240 तालुकों में से 217 में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है। इनमें 177 तालुकों को तीन चरणों में सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है, जबकि अन्य क्षेत्रों का आकलन जारी है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सूखे की वजह से 19.52 लाख हेक्टेयर कृषि और बागवानी फसलें बर्बाद हुई हैं। इनमें 17.85 लाख हेक्टेयर कृषि और 1.67 लाख हेक्टेयर बागवानी फसलें शामिल हैं। फसलों के नुकसान का अनुमान 18,748.23 करोड़ रुपये लगाया गया है, जबकि राज्य को कुल करीब 40 हजार करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमान है।

खरगे ने जलाशयों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार 31 अगस्त तक राज्य के 13 प्रमुख जलाशयों में जलस्तर काफी कम था। कावेरी बेसिन में भी पानी की कमी है। बेंगलुरु की पेयजल जरूरतों से जुड़े कृष्णराज सागर बांध में जल उपलब्धता 64 प्रतिशत बताई गई है।

उन्होंने केंद्र से कल्याणा-कर्नाटक क्षेत्र में नुकसान का जायजा लेने के लिए अतिरिक्त अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम भेजने की मांग की। राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन मैनुअल-2020 के तहत केंद्र को 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता का ज्ञापन सौंपा है।

 

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