न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों को भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता और ग्लोबल साउथ के साथ सहयोग को लेकर भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि एक बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में भारत का उभरना उसे विकासशील देशों के साथ साझा समृद्धि और विकास के लिए अधिक प्रभावी योगदान देने में सक्षम बनाता है।
कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरिबियन स्टेट्स (CELAC) के विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में देश की जीडीपी दोगुनी से अधिक हुई है और विकास दर भी मजबूत बनी हुई है।
विदेश मंत्री के मुताबिक भारत के पास बड़ी और तेजी से कुशल होती मानव संसाधन क्षमता, बढ़ती औद्योगिक क्षमताएं, विशाल बाजार, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगातार बढ़ती क्षमता है। इन संसाधनों के आधार पर भारत वैश्विक विकास और ग्लोबल साउथ के साझेदार देशों के लिए अधिक सार्थक योगदान देने की स्थिति में है।
जयशंकर ने कहा कि ग्लोबल साउथ के साथ भारत का संबंध केवल संकीर्ण राष्ट्रीय हितों तक सीमित नहीं है। उन्होंने इसे आपसी एकजुटता और साझा समृद्धि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता से जोड़ा। उन्होंने पिछले वर्ष जमैका में आए हरिकेन मेलिसा और इस वर्ष वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भारत की ओर से दी गई सहायता का भी उल्लेख किया। इसके अलावा कैरिबियन देशों में विकास परियोजनाओं और लैटिन अमेरिकी देशों को दवाओं की आपूर्ति का जिक्र किया।
जयशंकर ने उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन के साथ 33 सदस्यीय CELAC के विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक के बाद उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य और फार्मा, खाद्य एवं कृषि, ऊर्जा एवं संसाधन, छोटे और मध्यम उद्यम तथा डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।
बैठक में इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और मिशन लाइफ जैसी भारत की पहल को भी समर्थन मिला।