श्रीलंका के लिए भारत ने खोला रक्षा सहयोग का नया रास्ता

नई दिल्ली, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तीन दिवसीय श्रीलंका यात्रा के अंतिम दिन दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। श्रीलंकाई वायुसेना के लिए एल-70 तोपों के उन्नयन से जुड़े समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। इसके साथ ही राष्ट्रीय रक्षा कॉलेजों और राष्ट्रीय कैडेट कोर के बीच शैक्षणिक सहयोग को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

राजनाथ सिंह ने श्रीलंकाई प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या से मुलाकात कर विकास सहयोग, शिक्षा और दोनों देशों के करीबी सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों सहित कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि साझा विरासत वाली दोनों लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को क्षेत्र की शांति और समृद्धि के लिए साझा विकास दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान कोलंबो में गंगारामया मंदिर और नुवारा एलिया जिले स्थित सीता अम्मन मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। उन्होंने श्रीलंका के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की और भारत में प्रशिक्षण ले चुके अधिकारियों के साथ अपने पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया।

यात्रा के दूसरे दिन उन्होंने कुरूनेगला और बट्टीकलोआ में भारतीय सेना के इंजीनियरों द्वारा बनाए गए तीन बेली पुलों का वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके अलावा श्रीलंकाई वायुसेना और नौसेना के लिए आवश्यक पुर्जों की आपूर्ति भी की गई।

कोलंबो पोर्ट पर भारतीय युद्धपोत ‘उदयगिरि’ पर आयोजित डेक रिसेप्शन के दौरान श्रीलंकाई अधिकारियों को इंद्र मार्क-2 रडार के स्पेयर पार्ट्स, श्रीलंकाई नौसेना के जहाज ‘सौर्य’ के पुर्जे और इन्फ्लेटेबल टारगेट सौंपे गए। भारत के अनुसार, इन उपकरणों से श्रीलंकाई सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए ‘महासागर’ विजन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत श्रीलंका के सबसे करीबी पड़ोसी और सभ्यतागत साझेदार के रूप में हमेशा उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत-श्रीलंका की दोस्ती नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.