मुंबई । भारतीय मुद्रा रुपये पर मंगलवार को शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 10 पैसे कमजोर होकर 94.66 के स्तर पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों के करीब 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। बाजार में बढ़ी अनिश्चितता का सीधा असर रुपये की चाल पर दिखाई दे रहा है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 94.49 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें कमजोरी आई और यह 94.66 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। सोमवार को भी भारतीय मुद्रा दबाव में रही थी। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 13 पैसे की गिरावट के साथ 94.56 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव रुपये के लिए चुनौती बने हुए हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इससे रुपये की मांग-आपूर्ति पर भी असर पड़ता है।
हालांकि, बाजार में रुपये को कुछ हद तक सहारा भी मिल रहा है। कारोबारियों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से लगातार डॉलर की बिक्री और कुछ विशेष योजनाओं के तहत विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह रुपये को बाहरी दबावों के बावजूद सीमित दायरे में बनाए रखने में मदद कर रहा है।
इस बीच दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.37 प्रतिशत गिरकर 98.80 पर आ गया। डॉलर सूचकांक में कमजोरी के बावजूद कच्चे तेल की महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी पूंजी प्रवाह पर रहेगी। इन कारकों में बदलाव आने वाले कारोबारी सत्रों में रुपये की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।