अनाक क्राकाताऊ में जोरदार विस्फोट, 1.70 लाख यात्री फंसे

इंडोनेशिया में माउंट अनाक क्राकाताऊ ज्वालामुखी के अचानक सक्रिय होने से अफरा-तफरी मच गई है। ज्वालामुखी से निकली राख और काले धुएं का विशाल गुबार कई किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। हवा में फैली ज्वालामुखीय राख के खतरे को देखते हुए चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन रोकना पड़ा। इस स्थिति के कारण करीब 1.70 लाख यात्री अलग-अलग हवाई अड्डों पर फंस गए हैं।

जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा और हलीम परदानाकुसुमा एयरपोर्ट के साथ लाम्पुंग के राडिन इंटेन-2 और बांडुंग के हुसैन सास्त्रानेगारा हवाई अड्डे पर भी उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ है। अब तक 1,500 से अधिक उड़ानों के रद्द होने या प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक हवा में ज्वालामुखीय राख का खतरा बना रहेगा, तब तक विमानों के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इंडोनेशिया की मौसम और भूभौतिकीय एजेंसी के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में राख के दो बड़े गुबार जकार्ता की दिशा में बढ़ते नजर आए हैं। इससे राजधानी और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, ज्वालामुखीय राख सांस के जरिए शरीर में पहुंचने पर फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसके अलावा राख विमान के इंजन में प्रवेश कर उड़ान सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

जावा और सुमात्रा के बीच सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित अनाक क्राकाताऊ इंडोनेशिया के सक्रिय ज्वालामुखियों में शामिल है। इसका इतिहास भी बेहद खतरनाक रहा है। वर्ष 2018 में ज्वालामुखी का बड़ा हिस्सा समुद्र में गिर गया था, जिसके बाद सुनामी आई और 400 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

इससे पहले पिछले महीने पूर्वी जावा स्थित माउंट सेमेरू में भी विस्फोट हुआ था। इंडोनेशिया में लगातार हो रही ज्वालामुखीय गतिविधियों ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदा, हवाई सुरक्षा और आम लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

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