मुंबई। राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। मंगलवार को अदालत ने गिरगांव मजिस्ट्रेट की ओर से जारी समन को रद्द करने की राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए छह सप्ताह की राहत दी है।
न्यायमूर्ति नितिन बोरकर की पीठ ने कहा कि निचली अदालत के आदेश में ऐसी कोई स्पष्ट कानूनी खामी या गंभीर अनियमितता नहीं है, जिसके आधार पर हाईकोर्ट दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हस्तक्षेप करे।
यह मानहानि शिकायत भाजपा सदस्य महेश श्रीश्रीमल ने गिरगांव मजिस्ट्रेट की अदालत में दायर की थी। शिकायत के मुताबिक, राजस्थान में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से भाजपा समर्थकों की भावनाएं आहत हुई थीं। मजिस्ट्रेट ने अगस्त 2019 में राहुल गांधी को समन जारी किया था। जुलाई 2021 में समन प्राप्त होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया और पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग की।
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पसबोला ने दलील दी कि शिकायत राजनीति से प्रेरित है और इसका उद्देश्य उन्हें परेशान करना है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शिकायतकर्ता को इस मामले में मानहानि की शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है या नहीं।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता रोहन महाडिक और महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया। अदालत ने कहा कि कथित बयान का प्रभाव केवल प्रधानमंत्री तक सीमित था या भाजपा के अन्य सदस्यों एवं पदाधिकारियों तक भी पहुंचा, यह सवाल साक्ष्यों और पूरे मामले के संदर्भ के आधार पर ट्रायल के दौरान तय किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि दिसंबर 2021 में हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगाते हुए राहुल गांधी को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी थी। अब छह सप्ताह की राहत मिलने के बाद इस मामले में अगली कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में होने की संभावना है।