नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले राजधानी दिल्ली में भारत और रूस के बीच औद्योगिक एवं व्यापारिक सहयोग को नई गति देने की तैयारी है। 9 से 11 सितंबर के बीच पहली बार बड़े स्तर पर भारत-रूस इंटरनेशनल इंडस्ट्रियल ट्रेड फेयर आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
कार्यक्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, प्रदर्शनी का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीधे व्यापारिक संपर्क को बढ़ावा देना, नई तकनीकी साझेदारियों के अवसर तलाशना और संयुक्त औद्योगिक परियोजनाओं को गति देना है। भारत और रूस के कारोबारी एवं औद्योगिक प्रतिनिधियों के लिए यह मंच नए सहयोग की संभावनाएं खोल सकता है।
प्रदर्शनी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, रसायन उद्योग, डिजिटल तकनीक, खनन एवं उत्खनन तकनीक तथा मानव-केंद्रित तकनीक जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही द्विपक्षीय व्यापार और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने से जुड़े अवसरों पर भी चर्चा होगी।
भारत-रूस संबंधों के जानकारों का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन प्रदर्शनी का दौरा करते हैं तो इससे दोनों देशों के आर्थिक और औद्योगिक संबंधों को लेकर एक मजबूत संदेश जाएगा। यह दौरा केवल व्यापारिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति पुतिन के 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आने की संभावना है। भारत ने 13 जनवरी 2026 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी। इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने समिट से संबंधित आधिकारिक थीम, लोगो और वेबसाइट का शुभारंभ किया था।
पुतिन इससे पहले दिसंबर 2025 में दो दिवसीय भारत दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था।
ऐसे में सितंबर में प्रस्तावित औद्योगिक ट्रेड फेयर और उसके तुरंत बाद होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत-रूस संबंधों के आर्थिक और रणनीतिक पहलुओं को एक साथ सामने लाने वाला महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है।
