रक्षाबंधन पर शक्ति प्रदर्शन, टिकट बचाने की कवायद?

वंशिका बिष्ट
देहरादून।उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एक बार फिर अपने अजीबो-गरीब अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। रक्षाबंधन के मौके पर मसूरी विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने हजारों महिलाओं को इकट्ठा कर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। भीड़ देखकर सीएम भी प्रभावित दिखे, लेकिन सियासी गलियारों में इस आयोजन को शक्ति प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गणेश जोशी इस समय सियासी रूप से घिरे हुए हैं। उन पर कई तरह के आरोपों की तलवार लटकी है, जो उनके टिकट पर संकट खड़ा कर सकती है।

किन मामलों में घिरे हैं जोशी?

जमीन विवाद का मामला: मसूरी में एक जमीन पर कब्जे और सरकारी भूमि से जुड़े एक पुराने मामले में विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग करता रहा है। मामला कोर्ट में भी विचाराधीन है।

पूर्व विधायक से मारपीट का चर्चित केस: कुछ साल पहले पुलिस के सामने एक पूर्व विधायक के साथ हुई हाथापाई का मामला आज भी उनके आक्रामक छवि के रूप में देखा जाता है, जिसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था।

बयानों को लेकर विवाद: कई बार उनके बयानों से सरकार असहज हुई है। हाल में एक विभागीय बैठक में अधिकारियों को लेकर की गई टिप्पणी भी चर्चा में रही।

इन सब कारणों से चर्चा है कि हाईकमान इस बार मसूरी सीट पर नया चेहरा तलाश रहा है। आंतरिक सर्वे में भी मसूरी में एंटी-इनकंबेंसी की बात सामने आई है।

अंदर का खेल – बेटी नेहा के लिए लॉबिंग?

सूत्रों के अनुसार, इसी भय के चलते गणेश जोशी ने प्लान-बी पर काम शुरू कर दिया है। वे चाहते हैं कि यदि किसी कारण से उनका टिकट कटता है, तो यह सीट उनके परिवार में ही रहे और उनकी बेटी नेहा जोशी को टिकट मिल जाए। नेहा जोशी भाजपा युवा मोर्चा में सक्रिय हैं और लगातार मसूरी में सक्रिय दिख रही हैं।

पिछले एक महीने में गणेश जोशी कई बार दिल्ली में भाजपा के बड़े नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। रक्षाबंधन पर भारी भीड़ जुटाकर उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की है कि मसूरी में आज भी उनकी पकड़ मजबूत है और भीड़ जुटाने की क्षमता उनमें है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “जोशी जी वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन इस बार टिकट का फैसला सर्वे और छवि के आधार पर होगा। भीड़ से टिकट तय नहीं होता।”

फिलहाल मसूरी में रक्षाबंधन का यह आयोजन सियासी विरासत बचाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

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