डॉलर कमजोर पड़ा तो संभला रुपया, 95.64 पर पहुंचा; आगे क्या रहेगा रुख?

मुंबई,  अमेरिकी डॉलर में नरमी के बीच सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया सात पैसे मजबूत होकर 95.64 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण रुपये की तेजी सीमित रही। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक बाजार में डॉलर की मांग बनी रहने से भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया सोमवार को 95.68 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। कारोबार आगे बढ़ने के साथ यह 95.64 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इस तरह पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले रुपये में सात पैसे की मजबूती दर्ज की गई।

इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया बढ़त के साथ बंद हुआ था। शुक्रवार को भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले महज तीन पैसे मजबूत होकर 95.71 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुई थी। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में रुपये में मजबूती देखने को मिली है, हालांकि इसकी रफ्तार काफी सीमित रही।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी मुद्रा में आई नरमी ने रुपये को शुरुआती कारोबार में सहारा दिया। डॉलर सूचकांक में हल्की कमजोरी का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दिया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की ऊंची कीमत रुपये के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से डॉलर की मांग बढ़ती है और इसका सीधा असर रुपये पर पड़ सकता है।

इसके अलावा आयातकों की ओर से डॉलर की लगातार मांग भी रुपये की तेजी को सीमित कर रही है। विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबारियों की नजर अब वैश्विक बाजार के रुख, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है।

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.03 प्रतिशत बढ़कर 98.82 पर पहुंच गया। बाजार में निवेशकों की नजर आगे अमेरिकी मुद्रा की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की दिशा तय करने में आने वाले दिनों में डॉलर की मांग और तेल की कीमतें अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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