नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी करते हुए 405 रक्षा वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। अब इन वस्तुओं को तय समयसीमा के भीतर भारतीय स्रोतों से ही खरीदा जाएगा।
नई सूची में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स, सब-सिस्टम, सब-असेंबली, स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स और कच्चा माल शामिल है। इनमें भारतीय तटरक्षक बल की 16 और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) की 389 वस्तुएं हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सूची में शामिल वस्तुओं का इस्तेमाल भारतीय रक्षा बलों के कई महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म और प्रणालियों में किया जाता है। इनमें वायुसेना के एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, एसयू-30 एमकेआई, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और एएल-31एफपी इंजन से जुड़ी वस्तुएं शामिल हैं। वहीं सेना के टी-72, टी-90 और बीएमपी-II जैसे बख्तरबंद प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में हैं।
इसके अलावा नौसेना की मिसाइल प्रणालियों, रडार, सोनार, अग्नि नियंत्रण प्रणाली, उपग्रह संचार प्रणाली और अन्य रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स से संबंधित कई वस्तुओं को भी स्वदेशी स्रोतों से लेने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्रालय का कहना है कि स्वदेशीकरण पूरा होने के बाद इन वस्तुओं की खरीद भारतीय रक्षा उद्योग से की जाएगी।
इस प्रक्रिया में डीपीएसयू और भारतीय तटरक्षक बल घरेलू उद्योग, खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ाएंगे। इससे देश में रक्षा विनिर्माण क्षमता, निवेश और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रक्षा उत्पादन विभाग ने अगस्त 2020 में सृजन रक्षा पोर्टल शुरू किया था। जून 2026 तक इस पोर्टल के माध्यम से रक्षा उपक्रमों और सेवा मुख्यालयों के स्वदेशीकरण के लिए 33 हजार से अधिक रक्षा सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
पहली पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों में अब तक 5,012 वस्तुओं को शामिल किया जा चुका है। मंत्रालय के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में 15,700 से अधिक रक्षा वस्तुओं का स्वदेशीकरण हुआ है, जिससे करीब 9,000 करोड़ रुपये के आयात प्रतिस्थापन का अनुमान है। डीपीएसयू ने घरेलू विक्रेताओं को करीब 10 हजार करोड़ रुपये के खरीद आदेश भी दिए हैं।