देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए निर्वाचन विभाग ने जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सोमवार को सचिवालय में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर दस्तावेजों के शीघ्र सत्यापन के निर्देश दिए।
बैठक में विभिन्न विभागों के निदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया। इन अधिकारियों को सुनवाई के दौरान मतदाताओं की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाताओं के मामलों का निर्धारित समयसीमा के भीतर निस्तारण हो और किसी पात्र मतदाता को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
डॉ. पुरुषोत्तम ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 11 मान्य दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन किया जा रहा है। इनमें शैक्षिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर जैसे महत्वपूर्ण अभिलेख शामिल हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन दस्तावेजों का सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
अलग-अलग दस्तावेजों के लिए अलग नोडल अधिकारी
मैट्रिकुलेशन और अन्य शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए निदेशक माध्यमिक शिक्षा और निदेशक उच्च शिक्षा को नोडल अधिकारी बनाया गया है। स्थायी निवास, जाति प्रमाण पत्र और भवन आवंटन प्रमाण पत्रों के सत्यापन की जिम्मेदारी राजस्व परिषद को दी गई है।
इसी तरह जन्म प्रमाण पत्रों की जांच के लिए निदेशक शहरी विकास और निदेशक स्वास्थ्य को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। परिवार रजिस्टर और भवन आवंटन से संबंधित अभिलेखों के लिए निदेशक पंचायतीराज को जिम्मेदारी दी गई है। विभिन्न विभागों की ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन के लिए निदेशक आईटीडीए को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी बनाया गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला स्तर पर तैनात नोडल अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय रखते हुए राज्य स्तर से लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों का समय पर सत्यापन होने से SIR के दौरान जारी नोटिस की सुनवाई और मामलों के समाधान में तेजी आएगी।