5500 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे थे सोनू सूद, आज ऐसे बने ‘रियल हीरो’

मुंबई। अभिनेता सोनू सूद की पहचान आज सिर्फ एक फिल्म स्टार के तौर पर नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद करने वाले ‘रियल हीरो’ के रूप में भी होती है। इंजीनियरिंग में स्नातक सोनू सूद ने अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले मॉडलिंग में किस्मत आजमाई थी। इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में वह ग्रासिम मिस्टर इंडिया प्रतियोगिता के शीर्ष पांच प्रतिभागियों में शामिल हुए, जिसके बाद उनका रुझान मॉडलिंग की ओर बढ़ा।

अभिनय का सपना लेकर सोनू सूद मुंबई पहुंचे तो उनके सामने संघर्षों की लंबी राह थी। वह महज 5,500 रुपये लेकर मायानगरी आए थे और छह अन्य लोगों के साथ एक छोटे कमरे में रहते थे। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने 4,500 रुपये महीने की निजी नौकरी भी की। उनका पहला मॉडलिंग असाइनमेंट महज 500 रुपये का था।

निजी जिंदगी में सोनू सूद बेहद अनुशासित जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। वह शाकाहारी हैं और शराब व धूम्रपान से दूर रहते हैं। फिटनेस को लेकर भी वह काफी गंभीर हैं और किक-बॉक्सिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए हुए हैं। 25 सितंबर 1996 को उन्होंने सोनाली सूद से शादी की। दोनों के दो बेटे ईशांत और अयान हैं।

सोनू ने 1999 में तमिल फिल्म कल्लाझगर से फिल्मी करियर शुरू किया। इसके बाद 2002 में शहीद-ए-आजम से बॉलीवुड में कदम रखा। 2008 की तेलुगु फिल्म अरुंधति में खलनायक की भूमिका के लिए उन्हें नंदी पुरस्कार और फिल्मफेयर सम्मान मिला। वहीं 2010 की दबंग में छेदी सिंह के किरदार ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। 2017 में जैकी चैन के साथ कुंग फू योगा में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई।

हालांकि, उनकी सबसे बड़ी पहचान कोरोना महामारी के दौरान किए गए राहत कार्यों से बनी। सूद चैरिटी फाउंडेशन के जरिए उन्होंने 90 हजार से अधिक प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने में मदद की। इसके अलावा ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराने और हृदय सर्जरी में सहायता जैसे कई काम किए। उन्होंने युवाओं के लिए ‘संभवम्’ मुफ्त आईएएस कोचिंग और ‘संकल्प’ कानून प्रवेश जैसी पहल भी शुरू कीं। उनके सामाजिक योगदान को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 27 अगस्त 2021 को उन्हें ‘देश के मेंटर’ कार्यक्रम का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया।

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