स्वस्थ रहने के लिए कम वसा (लो-फैट) वाला भोजन खाने की सलाह लंबे समय से दी जाती रही है, लेकिन एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शोध के अनुसार, अत्यधिक कम वसा और अधिक कार्बोहाइड्रेट वाला आहार लेने वाले लोगों में मृत्यु का जोखिम उन लोगों की तुलना में अधिक पाया गया, जो संतुलित मात्रा में वसा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। इस अध्ययन ने खानपान और स्वास्थ्य से जुड़ी पारंपरिक सोच पर नई बहस छेड़ दी है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, जिन लोगों के दैनिक भोजन में ऊर्जा का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा वसा से प्राप्त होता है, उनमें मृत्यु का जोखिम अपेक्षाकृत कम देखा गया। इसके विपरीत, जिन लोगों के आहार में लगभग 60 प्रतिशत ऊर्जा कार्बोहाइड्रेट से आती है, उनमें मृत्यु दर का जोखिम अधिक पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि अधिक मात्रा में वसा का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हमेशा लाभदायक है, बल्कि संतुलित और गुणवत्तापूर्ण आहार का चयन अधिक महत्वपूर्ण है।
अध्ययन में यह भी बताया गया कि जब लोग वसा का सेवन बहुत कम कर देते हैं, तो उसकी भरपाई अक्सर अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों से करते हैं। यही कारण है कि दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों में, जहां भोजन में चावल, गेहूं और अन्य कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है तथा वसा का सेवन अपेक्षाकृत कम होता है, वहां स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
यह शोध दुनिया के पांच महाद्वीपों में रहने वाले लगभग 1.35 लाख लोगों पर किए गए व्यापक सर्वेक्षण पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने विभिन्न देशों के लोगों की खानपान संबंधी आदतों और उनके स्वास्थ्य परिणामों का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष निकाला।
हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी एक अध्ययन के आधार पर अपनी डाइट में बड़ा बदलाव नहीं करना चाहिए। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली ही लंबे और स्वस्थ जीवन की कुंजी मानी जाती है। यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह, हृदय रोग या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो आहार में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।