नई दिल्ली। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए ‘पेपर लीक बिल’ को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा नहीं होने दे रही है, जिससे देशभर के लाखों छात्रों की अपेक्षाओं को ठेस पहुंच रही है।
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रिजिजू ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों और युवाओं की लंबे समय से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए सरकार यह अहम विधेयक लेकर आई है। उनका कहना था कि यदि इतने महत्वपूर्ण विषय पर संसद में चर्चा ही नहीं हो पाए, तो यह लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं दोनों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी। उन्होंने कहा कि संसद बहस और विचार-विमर्श का सर्वोच्च मंच है और ऐसे जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा यहीं होनी चाहिए।
रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दल नारेबाजी, काले कार्ड दिखाने और अन्य विरोध प्रदर्शनों के जरिए सदन की कार्यवाही लगातार बाधित कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दें और विधेयक पर रचनात्मक चर्चा में भाग लें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी क्रम में परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का भी गठन किया गया है। सरकार का दावा है कि नया ‘पेपर लीक बिल’ प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक में दोषियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी और छात्रों का विश्वास परीक्षा प्रणाली में और मजबूत होगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से छात्रों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस विधेयक पर गंभीर और सकारात्मक चर्चा करने की अपील की।