उत्तर प्रदेश स्थित ऐतिहासिक और बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर देशभर में खुशी का माहौल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के लिए एक ऐतिहासिक सम्मान बताते हुए इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण कहा है।
शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सारनाथ का भगवान बुद्ध के जीवन से अत्यंत गहरा संबंध है। यहीं भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था, जिसने मानवता को करुणा, शांति और सद्भाव का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बुद्ध के विचार आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित कर रहे हैं और मानव कल्याण का मार्ग दिखा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यूनेस्को द्वारा सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना भारत की प्राचीन सभ्यता, समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक परंपरा को वैश्विक स्तर पर मिली बड़ी मान्यता है। यह सम्मान न केवल देश की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान देगा, बल्कि विश्वभर में भारत की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा को भी और मजबूत करेगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस उपलब्धि के बाद दुनिया के विभिन्न देशों से अधिक संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु सारनाथ पहुंचेंगे। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सारनाथ आने वाले लोग भगवान बुद्ध के आदर्शों, उनके शांति और करुणा के संदेश तथा भारतीय संस्कृति की महान परंपरा से प्रेरणा प्राप्त करेंगे।
सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और विकास को बल मिलेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसकी पहचान और भी मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि यह सम्मान भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।