नई दिल्ली। कांग्रेस ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। पार्टी के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर करीब दो महीने तक चुप्पी साधे रखी और बढ़ते जनदबाव के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि सरकार ने लंबे समय तक प्रश्नपत्र लीक की बात से इनकार किया, जिससे छात्रों का भरोसा पूरी तरह टूट गया।
शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देर रात वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक के मुद्दे पर अपनी बात रखी, लेकिन यह बयान काफी देर से आया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाई और राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी प्रेस वार्ता में भी ‘पेपर लीक’ शब्द का इस्तेमाल करने से परहेज किया। वहीं, शिक्षा मंत्रालय ने संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के समक्ष भी आधिकारिक रूप से यही कहा कि प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था। उनके अनुसार, जनता के बढ़ते दबाव के बाद सरकार को आखिरकार लीक की बात स्वीकार करनी पड़ी।
जयराम रमेश ने 2024 की नीट-यूजी परीक्षा का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कई परीक्षा केंद्रों पर संदिग्ध रूप से बड़ी संख्या में टॉपर्स सामने आने के बावजूद सरकार ने अनियमितताओं को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में हजारीबाग में प्रश्नपत्र लीक की बात स्वीकार की गई, लेकिन अब तक दोषियों को सजा नहीं मिल सकी।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले जिस संजीव मुखिया को इस मामले का मुख्य आरोपी बताया गया था, अब उसे निर्दोष बताया जा रहा है। साथ ही, यूजीसी-नेट परीक्षा मामले में सीबीआई की समापन रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा।
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, छात्रों पर कथित हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग दोहराई है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने के लिए सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी।