तेहरान/वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार 12वीं रात ईरान पर हवाई हमले करते हुए दक्षिणी बंदरगाह शहर बुशहर को निशाना बनाया। यह शहर ईरान के एकमात्र सक्रिय नागरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए जाना जाता है। हमले के बाद इलाके में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं और आपातकालीन सेवाओं को तुरंत मौके पर तैनात कर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुशहर प्रांत के अधिकारियों ने अमेरिकी हमले की पुष्टि की है। फारस की खाड़ी के तट पर स्थित यह शहर रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां रूस के सहयोग से निर्मित ईरान का एकमात्र चालू परमाणु ऊर्जा संयंत्र मौजूद है, जिससे इस हमले ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
उधर, अमेरिकी मध्य कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई जारी है। अमेरिका का दावा है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और व्यावसायिक जहाजों को खतरा हो सकता है।
तनाव बढ़ने के बीच कुवैत ने भी पूरे देश में अपनी वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी है। कुवैती सेना के अनुसार, ईरान की ओर से संभावित ड्रोन हमलों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। सेना ने नागरिकों से अपील की है कि ड्रोन को मार गिराने के दौरान होने वाले धमाकों से घबराने की आवश्यकता नहीं है।
इस बीच यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी संघर्ष में खुलकर हिस्सा लेने का दावा किया है। हूती संगठन ने कहा कि उसने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। हालांकि स्वतंत्र स्तर पर इस दावे की पूरी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने इस क्षेत्र में एक टैंकर पर हमले की पुष्टि की है।
लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।