उत्तराखंड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में विद्यालयी शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के ‘सार्थक ट्रैकर’ पर निर्धारित 202 लक्ष्यों में से राज्य अब तक 71 लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है, जबकि 111 लक्ष्यों पर तेजी से कार्य जारी है। शेष 20 लक्ष्यों पर केंद्र सरकार से दिशा-निर्देश मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की निदेशक वंदना गब्र्याल ने बताया कि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद राज्य में प्री-प्राइमरी शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत एससीईआरटी और सभी 13 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में कुल 14 मॉडल बालवाटिकाएं स्थापित की गई हैं। साथ ही प्रदेश के सभी 5,982 को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों में बालवाटिकाओं का संचालन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बालवाटिकाओं के बेहतर संचालन के लिए 11,196 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और अधिकारियों को दो चरणों में प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को रोचक और गतिविधि-आधारित बनाने के उद्देश्य से सभी प्राथमिक विद्यालयों में ‘जादुई पिटारा’ उपलब्ध कराया गया है, जिसमें 27 प्रकार के खिलौने और 13 प्रकार की शिक्षण सामग्री शामिल हैं। इसके अलावा स्कूल रेडीनेस मॉड्यूल ‘आरोही’ भी लागू किया गया है।
निदेशक के अनुसार, निपुण भारत मिशन के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान से संबंधित अध्ययन सामग्री तैयार कर विद्यालयों में पढ़ाई जा रही है, जिसकी ‘प्रगति ऐप’ के माध्यम से नियमित निगरानी की जा रही है। राज्य में स्कूल छोड़ चुके 3,198 बच्चों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से दोबारा शिक्षा से जोड़ा गया है। वहीं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए गृह-आधारित शिक्षा की व्यवस्था भी की गई है।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार नई शिक्षा नीति को पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू कर रही है। उनका कहना है कि लक्ष्य केवल आंकड़े पूरे करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, नवाचार आधारित और रोजगारोन्मुख शिक्षा पहुंचाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि शेष लक्ष्यों को भी तय समय सीमा में पूरा कर उत्तराखंड को NEP-2020 के सफल क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाएगा।