कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने नीट परीक्षा विवाद और 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अपने भविष्य को लेकर चिंतित छात्र किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि बेहतर और निष्पक्ष शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। ऐसे में सरकार को उन पर बल प्रयोग करने के बजाय उनकी बात गंभीरता से सुननी चाहिए।
प्रियंका गांधी ने कहा कि देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्र और उनके परिवार लंबे समय से कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। कई अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग के लिए कर्ज तक लेने को मजबूर हैं, लेकिन बार-बार पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों से उनकी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल छात्रों का नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों का भी सवाल है, जो अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आर्थिक और मानसिक संघर्ष कर रहे हैं।
कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे छात्रों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुनें और उनका समाधान निकालें। उन्होंने कहा कि छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं क्योंकि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही खामियों की जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालय की बनती है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले बड़ी प्रशासनिक विफलताओं की स्थिति में मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देते थे, लेकिन अब ऐसी परंपरा समाप्त होती नजर आ रही है।
प्रियंका गांधी ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आज देश का युवा अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित और निराश महसूस कर रहा है। यदि मेहनत के बावजूद परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं होगी, तो युवाओं का विश्वास व्यवस्था से उठ जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर युवा, गरीब और किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को छात्रों की आवाज सुननी चाहिए, जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।