AI के दौर में क्यों बदलनी होगी कानूनी शिक्षा? जानिए विशेषज्ञों की राय

देहरादून। उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज देहरादून में सोमवार से छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का विषय “विधि शिक्षा में नवाचारात्मक पहलू, तकनीक, अध्यापन पद्धति एवं गुणात्मक सुधार” रखा गया है। इसका उद्देश्य कानून की शिक्षा को बदलते समय और नई तकनीकों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना है।

कॉलेज की प्राचार्य प्रो. पूनम रावत ने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से विधि शिक्षा में उभरते नए रुझानों, तकनीकी बदलावों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद पूरे सप्ताह अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करेंगे।

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जितेंद्र जोशी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तेजी से बदलती तकनीक के दौर में पारंपरिक कानूनी शिक्षा पद्धति अब पर्याप्त नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि विधि शिक्षा को आधुनिक दृष्टिकोण और नई तकनीकों के अनुरूप विकसित किया जाए।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. धर्मबुद्धि ने कहा कि नवीन तकनीकों और संसाधनों से सुसज्जित शिक्षक ही गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। वहीं, डीन एवं उपकुलपति प्रो. राजेश बहुगुणा ने कहा कि कानून के शिक्षकों को न्यायालयों के नवीनतम फैसलों के साथ तकनीकी बदलावों की भी लगातार जानकारी रखनी होगी।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों सहित बड़ी संख्या में संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

 

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