सोनम वांगचुक पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, आखिर क्यों बढ़ा सियासी बवाल?

पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुलकर सामने आए हैं। जंतर-मंतर से वांगचुक को हटाए जाने की कार्रवाई पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से भूख हड़ताल कर रहे व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। इससे पहले कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी वांगचुक के समर्थन में अपनी बात रख चुकी हैं।

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार की नीतियां असत्य और हिंसा पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, महंगी होती शिक्षा और छात्रों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दे देश के भविष्य से जुड़े हुए हैं। इन समस्याओं पर आवाज उठाने वालों को दबाने का प्रयास लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। राहुल ने कहा कि छात्रों और उनके समर्थन में खड़े लोगों की आवाज को कोई भी ताकत नहीं दबा सकती।

इस बीच सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। उनके निजी चिकित्सक डॉ. नितिन दिघे ने दावा किया कि वह और उनकी मेडिकल टीम पिछले 20 दिनों से लगातार वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें और उनकी कानूनी टीम को अब तक वांगचुक से मिलने की अनुमति नहीं दी गई है। डॉ. दिघे के अनुसार, केवल वांगचुक की पत्नी को ही मुलाकात की इजाजत मिली है।

डॉ. दिघे ने अस्पताल प्रशासन के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल की ओर से पोटैशियम का स्तर कम होने की बात कही गई, जबकि उनके पास उपलब्ध पिछले दिन दोपहर की जांच रिपोर्ट में पोटैशियम का स्तर 4.8 दर्ज था, जो सामान्य सीमा के भीतर था। ऐसे में बाद में पोटैशियम कम होने के दावे पर उन्होंने स्पष्टीकरण की मांग की है।

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने, उनकी स्वास्थ्य स्थिति और उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दिए जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इस पूरे मामले को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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