काठमांडू। भारत और नेपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में अपने रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नेपाल के पोखरा में आयोजित भारत-नेपाल संयुक्त संचालन समिति (जेएससी) की 13वीं बैठक में दोनों देशों ने पनबिजली, सीमा-पार बिजली व्यापार और ट्रांसमिशन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल और नेपाल के ऊर्जा, जलस्रोत एवं सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाड़ी ने की। इससे पहले संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) की 13वीं बैठक भी आयोजित हुई, जिसमें तकनीकी और परियोजना स्तर के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने 400 केवी गोरखपुर–न्यू बुटवल ट्रांसमिशन लाइन सहित विभिन्न सीमा-पार बिजली प्रसारण परियोजनाओं में हुई प्रगति पर संतोष जताया। साथ ही, नई ट्रांसमिशन लाइनों, पनबिजली परियोजनाओं और प्रस्तावित ऊर्जा परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने के लिए आवश्यक कदमों पर सहमति बनी।
भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारतीय और नेपाली बिजली ग्रिड के बेहतर समन्वय, बिजली व्यापार को बढ़ावा देने तथा ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विकास, हरित हाइड्रोजन जैसे उभरते ऊर्जा क्षेत्रों में साझेदारी और नेपाली ऊर्जा विशेषज्ञों के क्षमता विकास पर भी विशेष चर्चा हुई।
संयुक्त संचालन समिति की बैठक से पहले 14 जुलाई को भारत के विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल ने नेपाल के ऊर्जा, जलस्रोत एवं सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को नई गति देने के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए।
बैठक के अंत में भारत और नेपाल ने विश्वास जताया कि इन निर्णयों से दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत होगा। साथ ही, भविष्य की साझा पनबिजली, ट्रांसमिशन और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। यह सहयोग क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।