बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) से जुड़े दानराशि विवाद को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर सार्वजनिक बहस से पीछे हटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बहस की चुनौती देने के बावजूद हेमंत द्विवेदी तय समय पर प्रेस क्लब नहीं पहुंचे, जबकि कांग्रेस तथ्यों और दस्तावेजों के साथ वहां मौजूद थी।
गणेश गोदियाल ने कहा कि इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि भाजपा और बीकेटीसी के पास अपने आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य नहीं हैं। उनका आरोप है कि भाजपा के नेता और मंदिर समिति के पदाधिकारी तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति को लेकर भी भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। गोदियाल के अनुसार, प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति वर्ष 2003 में हुई थी, जबकि उनका नियमितीकरण भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुआ और वर्ष 2014 में शासन स्तर से इसे मंजूरी दी गई। ऐसे में इस मामले की जिम्मेदारी कांग्रेस पर डालना उचित नहीं है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि असली मुद्दा बदरीनाथ धाम की दानराशि में कथित अनियमितताओं का है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मंदिर की दानराशि, सीसीटीवी फुटेज और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो इसकी जवाबदेही वर्तमान सरकार और बीकेटीसी प्रबंधन की बनती है।
गोदियाल ने कहा कि भाजपा हर विवाद में कांग्रेस को घसीटकर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है, लेकिन जनता सच्चाई को समझ रही है। उन्होंने दोहराया कि यदि बीकेटीसी अध्यक्ष किसी भी सार्वजनिक मंच पर तथ्यों के आधार पर बहस करना चाहते हैं तो कांग्रेस इसके लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने यह भी पूछा कि यदि उनके कार्यकाल में कोई अनियमितता हुई थी, तो भाजपा की नौ वर्षों की सरकार ने अब तक कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की। गोदियाल ने पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराने के साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि देवभूमि की आस्था और श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोपरि है, इसलिए दानराशि से जुड़े हर सवाल का निष्पक्ष जवाब मिलना चाहिए।