होर्मुज पर अमेरिका का बड़ा ऐलान, नाकाबंदी से मचेगा वैश्विक भूचाल!

होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण के दावे के बाद नाकाबंदी की तैयारी, भारतीय नाविक की मौत पर भारत ने ईरान के उप राजदूत को किया तलब

नई दिल्ली/वाशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया है और अब वहां नौसैनिक नाकाबंदी शुरू करने की तैयारी है। इसी बीच ओमान के समुद्री क्षेत्र में दो तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की मौत और कई अन्य भारतीयों के घायल होने के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए नई दिल्ली स्थित ईरान के उप राजदूत (डिप्टी चीफ ऑफ मिशन) को तलब किया है।

अमेरिकी सैन्य कमान सेंटकॉम (CENTCOM) ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का तीसरा चरण पूरा कर लिया गया है। इस दौरान ईरान के कई सामरिक ठिकानों, तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइल लॉन्चिंग साइटों और ड्रोन अड्डों को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया ने बंदर अब्बास, किश, केशम, अबू मूसा द्वीप, बुशहर, ओमिदियेह और चाबहार सहित कई इलाकों में जोरदार विस्फोटों की पुष्टि की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस को भेजे संदेश में कहा कि ईरान के साथ संघर्ष विराम अब प्रभावी नहीं रहा और सैन्य अभियान दोबारा शुरू हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकाबंदी लागू करेगा। ट्रंप का कहना है कि यह कार्रवाई केवल ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों के जहाजों को प्रभावित करेगी।

ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य का “गार्जियन एंजेल” बनेगा और इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क भी लिया जा सकता है। हालांकि ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह भी अपने समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल सकता है। वर्ष की शुरुआत में कुछ शिपिंग कंपनियों द्वारा ईरान को भुगतान किए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।

इस बीच ईरान ने अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों पर जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान समर्थित हमलों में जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों के ईंधन भंडारण केंद्रों और अन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। बहरीन में मिसाइल अलर्ट सायरन बजाए गए, जहां अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय स्थित है।

संयुक्त अरब अमीरात ने भी पुष्टि की है कि ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास दो तेल टैंकरों पर ईरानी क्रूज मिसाइलों से हमला हुआ। इन टैंकरों में आग लग गई और एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई, जबकि छह अन्य भारतीय नाविक घायल हुए। घायलों में दो यूक्रेनी नागरिक भी शामिल हैं। जहाजों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

भारतीय नागरिक की मौत के बाद भारत सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नई दिल्ली में ईरान के उप राजदूत को विदेश मंत्रालय बुलाया और घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। सरकार ने भारतीय नागरिकों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उधर, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने भी ओमान के लिमाह क्षेत्र के दक्षिण-पूर्व में एक टैंकर पर मिसाइल हमले की सूचना मिलने की पुष्टि की है। एजेंसी ने कहा कि घटना की जांच जारी है और समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

तेल बाजार पर भी इस टकराव का असर दिखाई देने लगा है। टैंकर ट्रैकर्स के अनुसार, ईरान पिछले 26 दिनों में करीब आठ करोड़ बैरल कच्चा तेल निर्यात कर चुका है, जिसकी अनुमानित कीमत छह अरब डॉलर से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह लागू हो जाती है तो ईरान करीब तीन करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल निर्यात नहीं कर पाएगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने हालांकि दावा किया कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद देश का तेल निर्यात सामान्य रूप से जारी है। उन्होंने अमेरिका पर 60 दिन की राहत अवधि से जुड़े समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि वाशिंगटन ने एक बार फिर अपने वादे से पीछे हटने का काम किया है।

सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच हुआ समझौता अब व्यावहारिक रूप से समाप्त माना जा सकता है। उनका कहना है कि किश द्वीप, बंदर अब्बास, अबू मूसा और केशम जैसे इलाकों पर लगातार हमले इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर रणनीतिक बढ़त हासिल करना चाहता है। ये सभी स्थान ईरान की समुद्री निगरानी और रक्षा व्यवस्था के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।

दूसरी ओर, ईरान ने अपने तट के पास से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों को विशेष समुद्री लेन का इस्तेमाल करने और ईरानी अधिकारियों से अनुमति लेने की चेतावनी दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की चिंता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियां इसी तरह बढ़ती रहीं तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से ईंधन की कीमतों में उछाल, समुद्री व्यापार में बाधा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। ऐसे में भारत सहित ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की चिंता भी लगातार बढ़ रही है।

 

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