नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को राष्ट्र निर्माण और समावेशी विकास को लेकर एक प्रेरक संदेश साझा किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर नीतिशास्त्र के एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की मजबूती तभी संभव है, जब महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं के संरक्षण और देश की एकता व सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
प्रधानमंत्री ने श्लोक “कन्यानां सम्प्रदानञ्च कुमाराणाञ्च रक्षणम्। राष्ट्रस्य सङ्ग्रहे नित्यं विधानमिदमाचरेत्॥” साझा करते हुए उसका अर्थ भी बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं का कल्याण सुनिश्चित करना, युवा पीढ़ी की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य करना तथा राष्ट्र की सुरक्षा, समृद्धि, एकता और सुचारु शासन के लिए निरंतर प्रयास करना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का प्रमुख दायित्व है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि इस सुभाषितम् का मूल भाव यह है कि जब विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचता है और प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है, तभी देश वास्तविक अर्थों में तेजी से आगे बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए सरकार इसी समावेशी सोच और राष्ट्रहित की भावना को सर्वोच्च महत्व दे रही है। प्रधानमंत्री का यह संदेश महिलाओं के सशक्तिकरण, युवा विकास और राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।