तेहरान/कुवैत सिटी/मनामा/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव के बीच ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और हालात पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
फ्यूल स्टोरेज टैंक और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को नुकसान पहुंचा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसकी वायुसेना ने कुवैत के अली अल सलेम स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। आईआरजीसी के अनुसार, हमले में बेस पर मौजूद फ्यूल स्टोरेज टैंक और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा लगभग 30 मील दूर स्थित अहमद अल जाबेर एयर बेस पर भी हमला किया गया, जहां एफपीएस रडार सिस्टम को क्षति पहुंचने का दावा किया गया है। हालांकि, कुवैत की सेना ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया गया
इसी बीच ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी कार्रवाई करने का दावा किया है। आईआरजीसी के मुताबिक, शेख ईसा एयर बेस पर हेलीकॉप्टर रखरखाव केंद्र, पी-8 पोसीडॉन विमान वाले हैंगर और ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, बहरीन के गृह मंत्रालय ने कहा कि अब तक किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। हमले की आशंका के बीच सरकार ने नागरिकों और प्रवासियों से शांत रहने तथा सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की।
ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर ताजा हमलों के बाद यह जवाबी कार्रवाई की गई। आईआरजीसी ने कहा कि उसने अमेरिका के सहयोगी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है।
अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सटीक हमले किए
उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान चलाते हुए कई रणनीतिक ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। सेंटकॉम के अनुसार, इस अभियान में लड़ाकू विमान, नौसेना के युद्धपोत, वन-वे अटैक ड्रोन और समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। इन हमलों का लक्ष्य ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, तटीय रडार, मिसाइल लॉन्चिंग क्षमता, ड्रोन नेटवर्क और छोटी सैन्य नौकाएं थीं।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि पिछले 24 घंटों में ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं अमेरिका का आरोप है कि आईआरजीसी लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हमले और गोलीबारी कर रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। अमेरिकी सेना ने यह भी कहा कि उसने ईरान की एक क्रूज मिसाइल और एक आत्मघाती ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।
सिंचाई पंप केंद्र पर मिसाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत
तनाव के बीच ईरान के बंदर अब्बास, सिरिक, जास्क और केशम द्वीप समेत कई इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। खुजेस्तान प्रांत के डिप्टी गवर्नर वलीओल्लाह हयाती के अनुसार, माहशहर क्षेत्र में एक सिंचाई पंप केंद्र पर मिसाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद गहरा
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यह समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला हुआ है और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही जारी है। वहीं ईरान के संबंधित समुद्री प्राधिकरण ने कहा है कि क्षेत्र में स्थिरता बहाल होने तक जलडमरूमध्य से सामान्य आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस बीच कुवैत, बहरीन, ओमान, कतर, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देशों ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला जारी रहा तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।