नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने मंगलवार को भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात कर बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य पर विस्तृत चर्चा की।
भारतीय सेना की ओर से जारी बयान के अनुसार, बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत-चीन संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। साथ ही द्विपक्षीय सहयोग, संवाद और विश्वास बहाली के लिए पहले से मौजूद तंत्रों को और अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और बदलते वैश्विक हालात के मद्देनजर आपसी समझ को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब एक दिन पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों में हाल के घटनाक्रमों की समीक्षा की और रिश्तों के क्रमिक सामान्यीकरण की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अजीत डोभाल ने इस दौरान कहा कि भारत और चीन के बीच स्थिर, संतुलित और रचनात्मक संबंध न केवल दोनों देशों के हित में हैं, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आपसी विश्वास और बेहतर समझ को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस बीच, राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं के लिए एक वीडियो संदेश भी जारी किया। उन्होंने यात्रा की तैयारियों, ठहरने की व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पारंपरिक तिब्बती कैलेंडर के अनुसार विशेष धार्मिक महत्व होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
दोराईस्वामी ने यात्रियों को आगाह किया कि कैलाश मानसरोवर क्षेत्र समुद्र तल से 3,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है, जबकि कैलाश परिक्रमा का सबसे ऊंचा बिंदु 5,605 मीटर तक पहुंचता है। ऐसे में यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतनी चाहिए।