अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और उसके उपयोग को लेकर उठे विवाद के बीच अयोध्या में सियासी और धार्मिक बहस तेज हो गई है। धर्मसेना प्रमुख और हिंदूवादी नेता संतोष दुबे ने राम मंदिर ट्रस्ट, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी), भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों में पारदर्शिता की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच कराने की आवश्यकता बताई है।
मीडिया से बातचीत में संतोष दुबे ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर मिलने वाले चढ़ावे और दान राशि के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की संपत्तियों में असामान्य वृद्धि हुई है, जिसकी जांच होनी चाहिए। दुबे ने विशेष रूप से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले एक व्यक्ति का उल्लेख करते हुए उनकी संपत्ति को लेकर सवाल उठाए।
धर्मसेना प्रमुख ने कहा कि श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण और पूजा-अर्चना के लिए सोना, चांदी और बड़ी मात्रा में धनराशि दान की है। ऐसे में यह आवश्यक है कि मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट चढ़ावे का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक करे, ताकि किसी प्रकार की आशंका या विवाद की स्थिति न बने।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर बाहरी लोगों का प्रभाव बढ़ गया है। उनके अनुसार, मंदिर निर्माण के बाद स्थानीय लोगों की भूमिका कम हुई है और निर्णय प्रक्रिया में बाहरी समूहों का वर्चस्व बढ़ा है। संतोष दुबे ने कहा कि अयोध्या की मूल परंपरा और मर्यादा को संरक्षित रखना जरूरी है।
दुबे ने कुछ संतों द्वारा हाल में दिए गए बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि मंदिर और उससे जुड़े मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट प्रशासन में बदलाव की भी मांग की।
हालांकि, संतोष दुबे द्वारा लगाए गए आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट, विश्व हिंदू परिषद या अन्य संबंधित पक्षों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों की सत्यता की पुष्टि होना बाकी है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।