जिस ब्रह्मोस को भारत ने बनाया, अब क्या वही मिसाइल खरीदेगा रूस? बड़ा संकेत आया सामने

नई दिल्ली। भारत और रूस की साझेदारी में विकसित दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल ब्रह्मोस को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने संकेत दिए हैं कि यदि रूस इस मिसाइल की खरीद के लिए औपचारिक ऑर्डर देता है, तो कंपनी उसकी आपूर्ति करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह घटनाक्रम भारत के रक्षा निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय नौसेना प्रदर्शनी ‘फ्लीट-2026’ के दौरान ब्रह्मोस एयरोस्पेस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि कंपनी के पास पर्याप्त उत्पादन क्षमता मौजूद है और वह रूस की सैन्य जरूरतों को अच्छी तरह समझती है। ऐसे में भविष्य में रूस को ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ब्रह्मोस मिसाइल भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त उपक्रम का परिणाम है। वर्ष 1995 में दोनों देशों ने मिलकर ब्रह्मोस एयरोस्पेस की स्थापना की थी। इस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मॉस्कवा नदी के नामों को जोड़कर रखा गया है।

ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज और सटीक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना लंबे समय से इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रही हैं। अपनी उच्च गति, सटीक निशाने और मारक क्षमता के कारण यह भारत की सामरिक शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

हाल के वर्षों में ब्रह्मोस की अंतरराष्ट्रीय मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2022 में फिलीपींस इस मिसाइल का पहला विदेशी ग्राहक बना था, जिसके साथ 37.5 करोड़ डॉलर का रक्षा समझौता हुआ। इसके बाद भारत ने वियतनाम को भी ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति की पुष्टि की है। वहीं इंडोनेशिया के साथ भी संभावित सौदे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस भी ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का फैसला करता है, तो यह भारत के रक्षा निर्यात इतिहास में एक नया अध्याय होगा। इससे न केवल भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में स्थिति मजबूत होगी, बल्कि स्वदेशी रक्षा तकनीक की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता भी बढ़ेगी।

 

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