होर्मुज संकट से निकलेगा भारत का मास्टरस्ट्रोक! समुद्र के नीचे बनने वाली पाइपलाइन बदल सकती है ऊर्जा का खेल
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। अमेरिका द्वारा ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर किए गए हमले और इसके जवाब में ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है।
इसी बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है। भारत और ओमान के बीच अरब सागर के नीचे लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी डीप-सी गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना को फिर से गति मिली है। करीब 40,000 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भविष्य में भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है।
वर्तमान में भारत अपनी कुल प्राकृतिक गैस आवश्यकता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। इसका बड़ा भाग खाड़ी देशों से एलएनजी (LNG) के रूप में आता है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचता है। ऐसे में यदि क्षेत्रीय तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर कोई बाधा आती है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
प्रस्तावित पाइपलाइन ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ेगी। इसके जरिए प्राकृतिक गैस को जहाजों के बजाय सीधे पाइपलाइन के माध्यम से भारत तक पहुंचाया जाएगा। इससे गैस आपूर्ति अधिक सुरक्षित, तेज और स्थिर होगी। साथ ही समुद्री संकट, भू-राजनीतिक तनाव और परिवहन लागत जैसी चुनौतियों का प्रभाव भी कम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो भारत को लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। यही कारण है कि होर्मुज संकट की आशंकाओं के बीच यह मेगा प्रोजेक्ट भारत के लिए एक रणनीतिक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।