नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लगातार आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। इसी बीच दिल्ली में पिछले 48 घंटों के दौरान हुई राजनीतिक गतिविधियों ने नए सियासी कयासों को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कांग्रेस नेतृत्व के साथ लगातार मुलाकातों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।
दरअसल, सोमवार को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक के दौरान ममता बनर्जी की कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात हुई। इस बैठक में नेताओं के बीच दिखाई गई गर्मजोशी ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। बंगाल चुनाव में झटका लगने के बाद ममता बनर्जी के लिए यह मुलाकात राजनीतिक और नैतिक समर्थन के तौर पर देखी गई।
इसके अगले ही दिन मंगलवार को ममता बनर्जी ने एक बार फिर 10 जनपथ पहुंचकर सोनिया गांधी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि यह बैठक करीब एक घंटे तक चली। बंद कमरे में हुई इस चर्चा के विषय को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन इसके बाद राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया। इसी दौरान कोलकाता में ममता बनर्जी के आवास पर सीआईडी टीम की गतिविधियों ने भी कई सवाल खड़े किए।
बुधवार को इस घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया, जब अभिषेक बनर्जी भी 10 जनपथ पहुंचे और सोनिया गांधी के साथ-साथ राहुल गांधी से भी मुलाकात की। लगातार तीसरे दिन हुई इन बैठकों ने टीएमसी और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये मुलाकातें विपक्षी एकता को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं। वहीं कुछ लोग इसे टीएमसी के भविष्य और कांग्रेस के साथ संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि दोनों दलों की ओर से किसी भी तरह के विलय या बड़े राजनीतिक फैसले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल दिल्ली में जारी इन मुलाकातों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई उत्सुकता पैदा कर दी है और सभी की नजरें कांग्रेस तथा टीएमसी के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।