हरिद्वार में हुआ देवभूमि पंचांग का विमोचन, संतों की मौजूदगी में मिला विशेष आशीर्वाद

 रुड़की/हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व के एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देवभूमि पंचांग का विधिवत विमोचन किया गया। यह कार्यक्रम निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु और ज्योतिष जगत से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

देवभूमि पंचांग के संपादक एवं प्रख्यात ज्योतिषाचार्य आचार्य पंडित रमेश सेमवाल जी महाराज ने इस अवसर पर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज का पटका और पुष्पमाला भेंट कर स्वागत किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। पंचांग के विमोचन के बाद उन्होंने इसे अपने लिए सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि यह पंचांग भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और धार्मिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

आचार्य रमेश सेमवाल ने बताया कि वह पिछले तीन से चार दशकों से पंचांग का नियमित प्रकाशन कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने देशभर में सैकड़ों ज्योतिष सम्मेलनों का सफल आयोजन भी किया है। उनके अनुसार पंचांग केवल तिथियों और पर्वों की जानकारी देने वाला ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा, ज्योतिष विज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का भी माध्यम है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक समय में भी पंचांग की उपयोगिता बनी हुई है। धार्मिक अनुष्ठानों, शुभ मुहूर्त, पर्व-त्योहारों और वैदिक परंपराओं के निर्धारण में पंचांग की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में इस प्रकार के प्रकाशन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

आचार्य रमेश सेमवाल की पहचान देश के प्रमुख ज्योतिषाचार्यों में होती है। उनकी कई भविष्यवाणियों के सही साबित होने के कारण उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं और संतों ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे ज्योतिष और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

कार्यक्रम का समापन धर्म, संस्कृति और समाज के उत्थान के संकल्प के साथ किया गया।

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